विंध्य की सियासत में ‘मधु अध्याय’ की वापसी कांग्रेस ने आखिर पहचान ही ली अनुभव की ताकत

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विंध्य की सियासत में ‘मधु अध्याय’ की वापसी कांग्रेस ने आखिर पहचान ही ली अनुभव की ताकत

जिला सिंगरौली मध्यप्रदेश की राजनीति में लंबे समय बाद ऐसा निर्णय सामने आया है, जिसे केवल एक संगठनात्मक नियुक्ति नहीं बल्कि विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस की नई रणनीतिक शुरुआत के रूप में देखा जा रहा है।

अखिल भारतीय महिला कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष अलका लाम्बा, मध्यप्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रभारी हरीश चौधरी, प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी, महिला कांग्रेस प्रभारी ममता चंद्राकर तथा मध्यप्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रीना बुराशी सेटिया के निर्देशानुसार सीधी-सिंगरौली की वरिष्ठ कांग्रेस नेत्री मधु शर्मा को प्रदेश महिला कांग्रेस का महासचिव एवं रीवा-शहडोल संभाग की प्रभारी नियुक्त किया गया है। यह नियुक्ति केवल एक राजनीतिक जिम्मेदारी नहीं, बल्कि कांग्रेस संगठन द्वारा अपने पुराने, अनुभवी और जमीनी नेतृत्व पर दोबारा भरोसा जताने का संकेत भी मानी जा रही है।

 

अनुभव, संघर्ष और संगठन की त्रिवेणी

विंध्य की राजनीति में श्रीमती मधु शर्मा का नाम किसी परिचय का मोहताज नहीं रहा। छात्र राजनीति से कांग्रेस की विचारधारा के साथ सक्रिय रहने वाली मधु शर्मा ने उस दौर में राजनीति की शुरुआत की, जब महिलाओं की सक्रिय भागीदारी सीमित मानी जाती थी।

स्वर्गीय अर्जुन सिंह की राजनीतिक छत्रछाया, दिग्विजय सिंह के नेतृत्व और अजय सिंह के मार्गदर्शन में उन्होंने संगठनात्मक राजनीति की मजबूत समझ विकसित की।

उनकी राजनीतिक यात्रा का सबसे महत्वपूर्ण अध्याय वह रहा, जब पंचायत राज व्यवस्था लागू होने के बाद अविभाजित सीधी जिले में वे प्रथम जिला पंचायत अध्यक्ष बनीं। उस समय यह उपलब्धि केवल व्यक्तिगत सफलता नहीं थी, बल्कि ग्रामीण लोकतंत्र में महिला नेतृत्व की ऐतिहासिक स्थापना भी थी। आज भी यह उपलब्धि मध्यप्रदेश के राजनीतिक इतिहास में एक मिसाल के रूप में देखी जाती है।

 

कांग्रेस की ‘देरी से सही, लेकिन सही’ रणनीति

 

राजनीतिक विश्लेषकों की मानें तो कांग्रेस ने लंबे समय तक मधु शर्मा जैसी अनुभवी नेत्री की संगठनात्मक क्षमता का अपेक्षित उपयोग नहीं किया। विंध्य क्षेत्र में पार्टी लगातार कमजोर होती गई, जबकि स्थानीय स्तर पर मजबूत जनाधार रखने वाले नेताओं को पर्याप्त जिम्मेदारियां नहीं मिल सकीं।ऐसे में यह नियुक्ति कई मायनों में महत्वपूर्ण है।पहला — कांग्रेस अब क्षेत्रीय नेतृत्व को फिर से केंद्र में लाने की कोशिश कर रही है। दूसरा — महिला कांग्रेस को केवल औपचारिक मंच न बनाकर उसे सक्रिय जनसंगठन के रूप में तैयार करने की रणनीति दिखाई दे रही है।तीसरा — रीवा और शहडोल जैसे राजनीतिक रूप से चुनौतीपूर्ण क्षेत्रों में अनुभवी और संघर्षशील नेतृत्व को आगे कर पार्टी संगठन को पुनर्जीवित करने का प्रयास किया जा रहा है।

 

महिला राजनीति को मिलेगा नया विस्तार

 

वर्तमान समय में राजनीति में महिला भागीदारी केवल प्रतिनिधित्व तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि संगठन संचालन और जनआंदोलनों में भी उनकी भूमिका निर्णायक हो रही है। ऐसे दौर में मधु शर्मा जैसी जमीनी और ओजस्वी नेत्री को जिम्मेदारी मिलना महिला कांग्रेस के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है। विशेष बात यह है कि मधु शर्मा का प्रभाव केवल राजनीतिक मंचों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि सामाजिक संवाद, ग्रामीण नेटवर्क और कार्यकर्ता समन्वय में भी उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। यही कारण है कि विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच इस नियुक्ति को उत्साह और उम्मीद के साथ देखा जा रहा है।

 

विंध्य में कांग्रेस को मिल सकता है नया चेहरा

 

बीते कुछ वर्षों में विंध्य क्षेत्र में कांग्रेस संगठन लगातार चुनौतियों से जूझता रहा है। ऐसे में अनुभवी नेतृत्व को आगे लाना संगठनात्मक दृष्टि से महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। यदि मधु शर्मा अपने पुराने जनसंपर्क, राजनीतिक अनुभव और संगठनात्मक कौशल का प्रभावी उपयोग करती हैं, तो महिला कांग्रेस ही नहीं बल्कि समूचे विंध्य में कांग्रेस संगठन को नई ऊर्जा मिल सकती है। स्पष्ट है कि यह नियुक्ति केवल पद वितरण नहीं, बल्कि कांग्रेस द्वारा विंध्य की राजनीति में खोया संतुलन वापस पाने की एक गंभीर कोशिश है। अब निगाहें इस बात पर रहेंगी कि मधु शर्मा अपने लंबे राजनीतिक अनुभव को संगठनात्मक मजबूती में किस तरह परिवर्तित करती हैं।