अदाणी फाउंडेशन का अहम योगदान रहा आजीविका स्वास्थ्य और शिक्षा के क्षेत्र में

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धिरौली और सुलियारी खदान के आसपास के गांवों में स्वरोजगार के लिए चलाए जा रहे कई कार्यक्रम

 

 

सिंगरौली: 26 नवंबर 2025 सरई तहसील के धिरौली, झलरी, बजौड़ी, डोंगरी, अमरईखोह, बेलवार और बासी बेरदहा गांवों में जरूरतमंद महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए अदाणी फाउंडेशन की ओर से ‘सक्षम योजना’ के तहत सिंगरौली क्लस्टर में अब तक 120 महिलाओं को निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण दिया जा चुका है। अब इन सिलाई प्रशिक्षण केन्द्र में प्रशिक्षित महिला ट्रेनर भी बन चुकी है। झलरी, खनुआ और धिरौली गांवों में पिछले तीन वर्ष में निःशुल्क सिलाई प्रशिक्षण केंद्र स्थापित कर महिलाओं को प्रशिक्षण दिया जा चुका है और प्रत्येक केंद्र पर 20 आधुनिक सिलाई मशीनें उपलब्ध कराई गई हैं, जहां हर बैच में 20 स्थानीय महिलाओं और किशोरियों को तीन महीने का प्रशिक्षण मिलता है। सफल प्रशिक्षण पूरा करने पर लाभार्थियों को राष्ट्रीय कौशल विकास निगम (NSDC) की ओर से प्रमाण-पत्र प्रदान किया जाता है, जिससे उनके लिए रोजगार और आत्मनिर्भरता के नए अवसर खुलते हैं। झलरी गांव की रहनेवाली सरस्वती सोनी कहती हैं, “प्रशिक्षण के बाद मुझे अपने घर में रहकर प्रतिदिन करीब पांच सौ रुपये की आमदनी हो जाती है।”

 

 

 

प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए चल रहा निःशुल्क कोचिंग सेंटर

 

अदाणी फाउंडेशन की ओर से स्थानीय छात्र-छात्राओं के लिए ‘डाइट फाउंडेशन’ के सहयोग से सरई और खनुआ नया में बैंक, एसएससी, रेलवे, संविदा शिक्षक, पटवारी, राज्य पुलिस और वन विभाग जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए निःशुल्क कोचिंग की व्यवस्था की गई है। इसके साथ ही पांचवीं कक्षा के होनहार विद्यार्थियों को नवोदय विद्यालय और एकलव्य आवासीय विद्यालय में प्रवेश परीक्षा की तैयारी भी अनुभवी शिक्षकों की टीम द्वारा करवाई जा रही है। नवोदय और एकलव्य विद्यालय में प्रवेश के लिए विशेष रूप से स्थानीय शासकीय विद्यालयों के पांचवीं कक्षा के छात्रों पर ध्यान दिया जा रहा है। उनके अभिभावकों की मदद से 125 बच्चों का पंजीकरण कराया गया है। तैयारी के लिए अदाणी फाउंडेशन की ओर से निःशुल्क किताबें और अध्ययन सामग्री भी प्रदान की गई है, ताकि किसी भी बच्चे की प्रतिभा संसाधनों की कमी से न रुके। इस पहल का उद्देश्य है कि ग्रामीण क्षेत्रों के प्रतिभाशाली बच्चों को मंच मिले, वे प्रतियोगी परीक्षाओं में आगे बढ़ें और अपने परिवार व गांव का नाम रोशन करें।

 

मील का पत्थर साबित हो रही ‘एकलव्य छात्रवृत्ति योजना’

 

सरई तहसील अंतर्गत धिरौली और सुलियारी परियोजनाओं से प्रभावित गांवों के होनहार बच्चे अब उच्च शिक्षा से वंचित नहीं रहेंगे। इनके उज्जवल भविष्य के लिए अदाणी फाउंडेशन की ‘एकलव्य छात्रवृत्ति योजना’ मील का पत्थर साबित हो रही है। यह योजना उन परिवारों के लिए वरदान है जो आर्थिक तंगी के कारण अपने बच्चों को उच्च शिक्षा नहीं दिला पाते थे। अब यह छात्रवृत्ति अनेक प्रतिभाशाली बच्चों को आगे बढ़ने और अपने सपनों को साकार करने का अवसर दे रही है। बजौड़ी गांव की आदिवासी परिवार की प्रिया सिंह, जो नर्सिंग की पढ़ाई कर रही हैं, कहती हैं, “अदाणी फाउंडेशन की ओर से दी गयी छात्रवृत्ति के बदौलत वो पढ़ पा रही हैं।”

 

अपने बेटे को अदाणी फाउंडेशन द्वारा दी जा रही स्कॉलरशिप से आईआईटी की पढ़ाई कर रहे धिरौली गांव के सूरत सिंह की मां लीलामती सिंह का कहना है, “जल्द से जल्द धिरौली खदान शुरू हो ताकि और भी बच्चों के लिए स्कॉलरशिप के साथ रोजगार के अच्छे अवसर मिल सकें।” स्थानीय ग्रामीणों को भरोसा है कि धिरौली खदान के शुरू होने से उनके बच्चों की पढ़ाई और भी बेहतर होगी और विभिन्न क्षेत्रों में प्रशिक्षण, कौशल विकास के जरिए स्थानीय युवाओं को रोजगार मिल सकेगा, जिससे समाज में समृद्धि आएगी।

 

‘गौ समृद्धि परियोजना’ से मजबूत हो रही ग्रामीण आजीविका

 

अदाणी फाउंडेशन की ओर से कॉर्पोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व के तहत सरई तहसील के धिरौली और सुलियारी परियोजना क्षेत्र के आसपास स्थित 18 गांवों में ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के लिए ‘गौ समृद्धि परियोजना’ संचालित की जा रही है। बायफ (भारतीय एग्रो इंडस्ट्रीज फाउंडेशन) के सहयोग से चल रही इस पहल के माध्यम से धिरौली के पशुधन विकास केंद्र में महिला पशुपालकों को निःशुल्क प्रशिक्षण देकर सशक्त बनाया जा रहा है। धिरौली, फाटपानी, भलया टोला, खनुआ खास, खनुआ नया, जत्था टोला, झलरी, आमडांड, अमरई खोह, बजौड़ी, सिरसवाह, मझौलीपाठ, बेलवार, बासी बेरदहा, जमगड़ी और डोंगरी जैसे गांवों की चार सौ महिला पशुपालक अब तक इस परियोजना से जुड़ चुकी हैं। इस वर्ष एक सौ और महिलाओं को इससे जोड़कर उनके जीवन स्तर में सुधार लाने का लक्ष्य तय किया गया है। ग्रामीणों ने अदाणी फाउंडेशन का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि इस परियोजना ने न केवल उनके पशुओं की नस्ल सुधारी है, बल्कि उन्हें आत्मनिर्भर बनने की राह भी दिखाई है।