सिंगरौली जिले के दूल्हे से शादी रचाने फ्रांस से आई दुल्हन

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सिंगरौली जिले के दूल्हे से शादी रचाने फ्रांस से आई दुल्हन

 

सात समंदर पार में तेरे पीछे-पीछे आ गई…। इस मशहूर हिन्दी फिल्म के गाने की ही तरह फ्रांस की एक लड़की हिंदू रीति रिवाजों के अनुसार सिंगरौली के लड़के से शादी करने के लिए इन दिनों बैढ़न आई हुई है।

 

वैढन में स्थित होटल सिंगरौली हेरिटेज पैलेस में इन दोनों की शादी की तमाम रस्में, रीति-रिवाज पूर्ण किये जा रहे हैं। होटल प्रबंधन भी अतिथि देवो भव के भाव से विदेशी मेहमानों के सेवा-सत्कार में जुटा है। बुधवार को हल्दी की रस्म बड़े ही धूमधाम से आयोजित हुई। अब गुरुवार को इनका हिंदू रीति-रिवाजों के साथ विवाह होगा।

 

इस शादी में वर-वधू दोनों पक्ष से बराती घराती भी बड़ी संख्या में शामिल हुए हैं। जिसमें वधू पक्ष से उनके माता-पिता, अन्य रिश्तेदार व फ्रेंड्स भी शामिल हैं। दरअसल, फ्रांस के ओलांस निवासी शालॉट ओलानियों (दुल्हन) की शादी बेल्जियम में कार्यरत वैढ़न के पचखोरा रोड निवासी संदीप कुमार सिंह (दूल्हा) पिता स्व. रमेश कुमार सिंह से हो ही है। वैसे तो ये भी अन्य शादियों की ही तरह एक सामान्य शादी है, लेकिन एक विदेशी लड़की का सिंगरौली में आकर यहां के लड़के से भारतीय परंपरा के अनुसार शादी करना, इसे अलग बना रहा है।

 

दुल्हन व उनके पैरेंट्स हिन्दू रीति-रिवाजों को लेकर इतने अधिक प्रभावित हैं कि उनकी चाहत भारत में हिन्दू रीति-रिवाज से शादी करने की थी। जिसे वह सिंगरौली आकर पूरा कर रहे हैं। इसलिए ये शादी अन्य शादियों से खास बन गई है। किसी विदेशी बाला का परिक्षेत्र में आकर सिंगरौली के युवा से हिंदू रीति रिवाज से करने का यह आयोजन पहला बताया जा रहा है।

 

सिंगरौली मेरा घर है, इसलिए शादी करने आयाः संदीप

 

संदीप बताते हैं विदेश में रहने के कारण अपने देश और अपने सिंगरौली की याद आती रहती है। धार्मिक रूप से भी मैं अपने हिंदू धर्म से काफी लगाव रखता हूं। ऐसे में जब फ्रांस निवासी शालॉट ओलानियों से उनकी शादी तय हुई तो उन्होंने अपने देश में शादी की बात रखी। हिंदू रीति-रिवाज से पहले से प्रभावित उनके ससुराल वाले वाराणसी में शादी करने को तैयार हुये, मगर संदीप का मन सिंगरौली में ही शादी करने का था, क्योंकि उनका पूरा बचपन यहीं बीता है। दोस्त-यार व अन्य परिचित लोग यहीं हैं। ऐसे में ससुराल वालों को जब ये बताया तो वे लोग भी सिंगरौली आकर हिंदू रीति-रिवाज से शादी करने को तैयार हो गये।

 

अन्य संस्कृतियों को भी बराबर सम्मान देते हैं संदीप

 

संदीप कहते हैं कि उनकी और शालौट की मुलाकात बेहद सादगीपूर्ण तरीके से हुई। उनके बीच फिल्मी कहानी जैसा कुछ नहीं हुआ। यहां तक कि उन्होंने अपनी पत्नी को आज तक विदेशी कल्चर के अनुसार प्रपोज तक नहीं किया है। हालांकि, वह यह भी कहते हैं कि अपने भारतीय कल्वर की भांति वह अन्य संस्कृतियों को बराबर सम्मान देते हैं, इसलिए यहां से लौटने के बाद वह बेल्जियम में पत्नी शालोंट के धर्म के रीति-रिवाजों के अनुसार भी एक बार शादी करेंगे, ताकि पत्नी के माता-पिता की ख्वाहिश पूरी कर सकें।

 

पिता एमपीईबी में थे, पढ़ाई सरस्वती स्कूल बिलौंजी से हुई

 

संदीप का परिवार मूलरूप से वाराणसी का रहने वाला है, मगर सिंगरौली जब सीधी जिले में आता था तो उस समय उनके दादा जी यहां नौकरी करने आये थे। जिससे परिवार यहीं का हो गया और पिताजी भी यहीं एमपीईबी में रेवेन्यू ऑडिटर के पद पर नौकरी करते थे।

 

बीमारी के कारण नौकरी दौरान उनकी मृत्यु हो गई थी। वह अपने बारे में बताते हैं कि उनकी 12वीं की पढ़ाई सरस्वती शिशु मंदिर वैढ़न से 2004 में पूर्ण हुई थी। फिर कम्प्यूटर साइंस में इंदौर से बैचलर और पुणे से मास्टर किया। कुछ साल देश में ही नौकरी करने के बाद एक प्रोजेक्ट के लिए 2014 में 2-3 बार बेल्जियम गये और फिर 2015 में वहीं आईटी कंसल्टेंसी की बिजनेस शुरू किया। तब से संदीप वहीं पर काम कर रहे हैं