राजस्व न्यायालयों में कार्य ठप्प, जनता प्रभावित
जिले भर के तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार न्यायिक और कार्यपालिक विभाजन के विरोध में आज कार्य से विरत रहे। इस कारण समस्त राजस्व न्यायालयों में नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन एवं भूमि विवाद से संबंधित समस्त कार्यवाही ठप्प हो गई। केवल प्राकृतिक आपदा से जुड़े कार्यों को छोड़कर शेष सभी राजस्व कार्य बाधित रहे।
तहसीलदार संघ ने सरकार की न्यायिक और कार्यपालिक कार्यों के विभाजन की नीति पर गहरा असंतोष जताया है। बताया गया कि यह योजना वर्तमान में प्रदेश के 25 जिलों में लागू की गई है, जिससे पूरे प्रदेश में राजस्व तंत्र में हड़कंप की स्थिति उत्पन्न हो गई है। जिले में संचालित 22 राजस्व न्यायालयों में कार्य बंद रहने से आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
तहसीलदारों का कहना है कि सरकार द्वारा राजस्व न्यायालयों में पीठासीन अधिकारियों की संख्या में कमी किए जाने से प्रकरणों के निराकरण की गति पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा। इससे आम जनता को समय पर न्याय नहीं मिल पाएगा और न्यायिक प्रक्रियाओं में अनावश्यक विलंब होगा।
तहसीलदार संघ ने जनहित को ध्यान में रखते हुए शासन से इस योजना को शीघ्र वापस लेने की मांग की है। जिले में मुख्यालय तहसीलदार सविता यादव, जाह्नवी शुक्ला, चितरंगी तहसीलदार ऋषि नारायण सिंह, सरई तहसीलदार चंद्रशेखर मिश्रा, नायब तहसीलदार प्रीति सिकरवार दीपेंद्र सिंह राजेंद्र बंसल मुख्यालय उपस्थित रहे।
—





