सिंगरौली में भ्रष्टाचार का ‘नंगा नाच’: पटवारी रंगे हाथ गिरफ्तार, पर क्या ‘पति-राज’ और दलाली पर लगेगी लगाम

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सिंगरौली। जिले में भ्रष्टाचार की जड़ें इतनी गहरी हो चुकी हैं कि अब प्रशासनिक मर्यादाएं तार-तार हो रही हैं। एक तरफ लोकायुक्त की टीम लगातार घूसखोरों को दबोच रही है, वहीं दूसरी तरफ पटवारियों ने तहसील परिसर को अपनी जागीर बना लिया है।

 

लोकायुक्त की बड़ी स्ट्राइक: ₹10,000 लेते धराया पटवारी

 

हालिया मामले में, रीवा लोकायुक्त की टीम ने चुरकी हल्का के पटवारी अम्बरीष बैंस को ₹10,000 की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ गिरफ्तार किया है। पीड़ित जमीन संबंधी कार्य के लिए महीनों से भटक रहा था और पटवारी की मांग से त्रस्त होकर उसने लोकायुक्त की शरण ली। जाल बिछाकर आरोपी को दबोचा गया और केमिकल टेस्ट में हाथ गुलाबी होते ही भ्रष्टाचार की पुष्टि हो गई।

 

नौगई हल्का का शर्मनाक हाल: पटवारी की कुर्सी पर वकील पति का कब्जा

 

चुरकी की घटना तो महज एक झांकी है; सिंगरौली के ग्राम पंचायत नौगई में तो नियम-कानूनों की धज्जियां ही उड़ा दी गई हैं। यहाँ की महिला पटवारी ने अपना सारा सरकारी कार्यभार अपने पति शेषमणि बैस (जो पेशे से वकील हैं) को सौंप दिया है।

 

अवैध सत्ता: सरकारी फाइलों का निपटारा तहसील में बैठकर पटवारी के बजाय उनके पति द्वारा किया जा रहा है।

 

जनता की बेबसी: ग्रामीण जनता इस ‘दोहरी व्यवस्था’ और दलाली के चक्रव्यूह में फंसकर रह गई है।

 

राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार का ‘नंगा नाच’

 

सिंगरौली के पंचायत और राजस्व विभाग में भ्रष्टाचार इस कदर हावी है कि बिना ‘चढ़ावे’ के एक कागज भी आगे नहीं सरकता। जमीनी विवादों और नामांतरण जैसी प्रक्रियाओं में ज्ञापन और समय की बर्बादी केवल इसलिए की जाती है ताकि फरियादी हार मानकर रिश्वत की रकम मेज के नीचे सरका दे

 

कड़वा सच

 

लोकायुक्त की कार्रवाई के बाद विभाग में हड़कंप तो मचता है, लेकिन सिंगरौली जिले की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल बदस्तूर जारी हैं। जब तक पटवारियों के परिजनों का तहसील में हस्तक्षेप बंद नहीं होगा और ‘कमीशन’ का यह खेल नहीं रुकेगा, तब तक ग्रामीण जनता इसी तरह त्रस्त रहेगी।

 

प्रशासन से चुभते सवाल:

 

क्या जिला प्रशासन को नौगई हल्का में चल रहे इस ‘पति-राज’ की खबर नहीं है? लोकायुक्त की कार्रवाई के बावजूद राजस्व अधिकारी भ्रष्टाचार पर लगाम कसने में नाकाम क्यों हैं? आखिर कब तक सिंगरौली की जनता इन पटवारियों के ‘भ्रष्टाचार के नंगे नाच’ की बलि चढ़ती रहेगी?