समीम बेग की रिपोर्ट
मोबाइल नेटवर्क के लिए ग्रामीणों ने डीएम और विधायक से लगाई गुहार, आखिर ननियागढ़ कब जुड़ेगा संचार की मुख्यधारा से?
सिंगरौली/ननियागढ़। डिजिटल इंडिया के दौर में जहां मोबाइल फोन आज शिक्षा, रोजगार, बैंकिंग, स्वास्थ्य और सरकारी सेवाओं की जरूरत बन चुका है, वहीं गोभा पंचायत क्षेत्र का टोला ननियागढ़ मोबाइल नेटवर्क के लिए अब भी तरस रहा है।
ग्रामीणों के मुताबिक गोभा क्षेत्र में Jio और Airtel का नेटवर्क उपलब्ध है, लेकिन ननियागढ़ में किसी भी मोबाइल कंपनी का नेटवर्क नहीं पहुंचता। ऐसे में सवाल उठना स्वाभाविक है कि जब नेटवर्क आसपास के क्षेत्र तक पहुंच चुका है, तो ननियागढ़ के ग्रामीणों को इस सुविधा से अब तक क्यों वंचित रखा गया है?
मोबाइल है, लेकिन नेटवर्क नहीं—क्या करे ग्रामीण?
ननियागढ़ के ग्रामीणों का कहना है कि मोबाइल फोन होने के बावजूद नेटवर्क के अभाव में वे कॉल और इंटरनेट जैसी बुनियादी सुविधाओं का उपयोग नहीं कर पा रहे हैं। ऑनलाइन भुगतान, सरकारी योजनाओं के आवेदन, विद्यार्थियों की ऑनलाइन पढ़ाई, रोजगार संबंधी कार्य और जरूरी दस्तावेजों से जुड़े ऑनलाइन काम प्रभावित हो रहे हैं।
सबसे गंभीर स्थिति आपातकालीन समय में बनती है। किसी व्यक्ति की तबीयत बिगड़ने या किसी अन्य आकस्मिक स्थिति में तत्काल फोन करना भी मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का सवाल है कि ऐसी परिस्थिति में आखिर वे मदद के लिए किसके भरोसे रहें?
डीएम और विधायक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग
ग्रामीणों ने इस समस्या को लेकर सिंगरौली जिले के डीएम एवं विधानसभा क्षेत्र क्रमांक 80 के विधायक श्री रामनिवास शाह से हस्तक्षेप की मांग की है। ग्रामीणों की मांग है कि ननियागढ़ में संबंधित विभाग और मोबाइल नेटवर्क कंपनियों की टीम भेजकर मौके पर नेटवर्क सर्वे कराया जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि तकनीकी रूप से संभव हो तो ननियागढ़ में मोबाइल टावर अथवा अन्य आवश्यक नेटवर्क व्यवस्था स्थापित की जाए, ताकि गांव के लोगों को संचार और डिजिटल सेवाओं से जोड़ा जा सके।
सवाल सीधा है—ननियागढ़ कब जुड़ेगा?
जब आसपास के क्षेत्र में मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध है, तो ननियागढ़ को नेटवर्क से जोड़ने में आखिर बाधा क्या है? ग्रामीणों की मांग अब केवल मोबाइल इंटरनेट की नहीं, बल्कि शिक्षा, रोजगार, बैंकिंग, सरकारी सेवाओं और आपातकालीन संचार की सुविधा से जुड़ी हुई है।
अब देखना यह है कि जिम्मेदार विभाग और मोबाइल नेटवर्क कंपनियां ग्रामीणों की इस समस्या का संज्ञान लेकर जमीनी स्तर पर जांच और स्थायी समाधान की पहल कब करती हैं।






