श्री महादेव इंटरप्राइजेज द्वारा धड़ल्ले से जारी अवैध खनन राजस्व और पर्यावरण को भारी क्षति

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श्री महादेव इंटरप्राइजेज द्वारा धड़ल्ले से जारी अवैध खनन राजस्व और पर्यावरण को भारी क्षति

 

 

ओबरा /सोनभद्र। स्थानीय क्षेत्र अंतर्गत स्थित श्री महादेव इंटरप्राइजेज की खदान में प्रशासनिक नियमों और सुरक्षा मानकों को ताक पर रखकर अवैध खनन का कारोबार बदस्तूर जारी है। एक तरफ जहां संबंधित विभाग और जिम्मेदार अधिकारी खनन मानकों का सख्ती से पालन कराने के दावे कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ यह फर्म पूर्व में जुर्माना लगने के बाद भी बेखौफ होकर तय सीमा से कई गुना अधिक खनन कर रही है।

 

 

डीजीएमएस और पर्यावरण मानकों का सरेआम उल्लंघन

 

 

सूत्रों और स्थानीय स्थिति के अनुसार, इस खदान में डायरेक्टरेट जनरल ऑफ माइंस सेफ्टी के सुरक्षा मानकों की खुलेआम अनदेखी की जा रही है। खदान में ‘बेंच बनाकर खनन करने’ के अनिवार्य नियम का बिल्कुल भी पालन नहीं हो रहा। इसके साथ ही, प्रदूषण नियंत्रण नियमों की धज्जियां उड़ाते हुए दिन-रात प्रतिबंधित भारी मशीनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।

 

 

तीव्र ब्लास्टिंग से सहमे ग्रामीण, उड़ती धूल से सांसों पर संकट

 

 

रातों-रात मुनाफा कमाने की होड़ में खनन संचालकों का ध्यान केवल अत्यधिक उत्खनन पर टिका है। खदान में होने वाली तीव्र ब्लास्टिंग के कंपन्न से जहां आसपास के मकानों में दरारें आने की आशंका बढ़ गई है, वहीं उड़ने वाली गर्द-धूल से स्थानीय लोगों का जीना मुहाल हो गया है। ग्रामीणों में स्वास्थ्य समस्याओं को लेकर भारी आक्रोश पनप रहा है।

 

 

पट्टा सीमा से बाहर अवैध उत्खनन व राजस्व को करोड़ों का चूना

 

 

खनन विभाग द्वारा अवैध गतिविधियों पर अंकुश लगाने के दावों के बावजूद धरातल पर स्थिति जस की तस बनी हुई है। बताया जा रहा है कि यह फर्म स्वीकृत लीज (पट्टा) क्षेत्र से बाहर जाकर निर्धारित क्षमता से कई गुना अधिक बोल्डर का अवैध उत्खनन और विपणन कर रही है। इस हेरफेर से राज्य सरकार को हर साल लाखों-करोड़ों रुपये के राजस्व का नुकसान हो रहा है।

 

जनहित में हस्तक्षेप की मांग

 

क्षेत्रवासियों और जागरूक नागरिकों की मांग है कि शासन-प्रशासन और उच्च अधिकारी इस गंभीर मामले का तत्काल संज्ञान लें। खदान की निष्पक्ष जांच कराकर मानकों की अनदेखी करने वाली फर्म पर सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाए, ताकि पर्यावरण रक्षा के साथ राज्य के राजस्व की हो रही क्षति को रोका जा सके।