कलेक्टर के प्रतिवेदन पर बड़ी कार्रवाई

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मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का सासन पावर को आदेश जारी

विशेषज्ञ समिति की रिपोर्ट के आधार पर एश डाइक में सुधार के तकनीकी निर्देश, 31 दिसंबर तक कार्य पूर्ण करने की समय-सीमा

एश डाइक की सुरक्षा सुनिश्चित करने सासन पावर को ₹50 लाख की बैंक गारंटी जमा करने के निर्देश

CCTV, अर्ली वार्निंग सिस्टम, पाईजोमीटर एवं ड्रेनेज सिस्टम सहित वैज्ञानिक निगरानी व्यवस्था होगी सुदृढ़

वर्षा के दौरान सासन पावर लिमिटेड के एश डाइक के बाहरी हिस्से के क्षतिग्रस्त होने तथा फ्लाई-ऐश के आसपास के खेतों तक पहुंचने की घटना को कलेक्टर श्री गौरव बैनल ने गंभीरता से लेते हुए एश डाइक की तकनीकी सुरक्षा एवं स्थायित्व की विस्तृत जांच के लिए पहल की थी। कलेक्टर के प्रतिवेदन के आधार पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा जांच समिति गठित की गई।

विशेषज्ञ समिति द्वारा 03 एवं 04 सितंबर 2026 को एश डाइक का स्थल निरीक्षण किया गया तथा समिति द्वारा प्रस्तुत तकनीकी रिपोर्ट के आधार पर मध्यप्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने सासन पावर लिमिटेड को एश डाइक की सुरक्षा एवं स्थायित्व के संबंध में विस्तृत निर्देश जारी किए हैं।

बोर्ड द्वारा
1) क्षतिग्रस्त एम्बैंकमेंट की निर्धारित डिजाइन के अनुरूप मरम्मत एवं व्यवस्थित कॉम्पैक्शन,
2) डाउनस्ट्रीम स्लोप का ग्रेडिंग एवं इरोशन प्रोटेक्शन,
3) प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम, क्रैक्स एवं इरोशन चैनल का उपचार तथा
4) एश डाइक की जियोटेक्निकल असेसमेंट एवं स्टेबिलिटी एनालिसिस कराने के निर्देश दिए गए हैं,
5) साथ ही टो-ड्रेन एवं गैबियन वॉल, CCTV आधारित सतत निगरानी, महत्वपूर्ण हिस्सों में ऑटोमेटेड अर्ली वार्निंग सिस्टम, पाईजोमीटर से पोर-वॉटर प्रेशर एवं वाटर-लेवल की निगरानी तथा सेटलमेंट/डिफॉर्मेशन मॉनिटरिंग की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया है।

एश डाइक के सुधारात्मक कार्यों को 31 दिसंबर 2026 तक पूर्ण करने की समय-सीमा निर्धारित की गई है। साथ ही बोर्ड द्वारा कार्यों के अनुपालन को सुनिश्चित करने के लिए ₹50 लाख की बैंक गारंटी जमा करने के निर्देश दिए गए हैं। आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि एश डाइक के क्षतिग्रस्त हिस्से की बहाली पूर्ण होने और सक्षम प्राधिकारी द्वारा सत्यापन के बाद ही संबंधित Lagoon-1 में फ्लाई-ऐश स्लरी का निस्तारण पुनः किया जा सकेगा।

जिला प्रशासन द्वारा एश डाइक की सुरक्षा, पर्यावरणीय संरक्षण एवं आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए की गई कार्रवाई के परिणामस्वरूप अब सुधारात्मक कार्यों की तकनीकी निगरानी एवं समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित किया जाएगा।