ओबरा डैम पर कोयला चोरी का मास्टरमाइंड कौन? 4 माह से चल रहे इस गोरख धंधे के हिस्सेदार कौन?
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ओबरा/ सोनभद्र। लगभग चार माह पूर्व से होते रहे ओबरा डैम पर गोरख धंधे को वैध बताते हुए ऐडवन कंपनी का नाम सामने आया । इस गोरख धंधे में बिजली उत्पादन के लिए आए कोयल की रैकों की साफ सफाई करने के नाम पर बड़े पैमाने पर कोयला बेचा जाता रहा । लगभग 100 टन प्रतिदिन कोयला बेचा जाता रहा जबकि यदि 100 टन कोयला रेक में बचा जाता रहा तो इतनी ही मात्रा की कमी ओबरा पावर प्लांट को भी होनी चाहिए किंतु ऐसी कोई बात सामने नहीं आई क्योंकि जब स्टेशन यार्ड पर ही कोयला बड़े पैमाने पर रखा गया और यह बताया गया कि यह कोयला एंपटी रैक से निकाला गया है जबकि लगभग 4 से 5 गाड़ी यानी लगभग 100 टन कोयला प्रतिदिन बेचा गया । नगर वासियों द्वारा शारदा मंदिर से बग्घा नाला के बीच इन कोयला की गाड़ियों को कई बार देखा गया और स्थानीय लोगों द्वारा बताया भी गया कि लगभग चार से पांच गाड़ी प्रतिदिन कोयला बेचा जा रहा है उसके बावजूद इतना बड़ा कोयला भंडारण मौजूद है वहां उपस्थित रेलवे कर्मचारी व कार्य कर रहे मजदूरों द्वारा नागपुर की एक कंपनी एडवन का नाम भी लिया गया जो कि कोयला के एम्टी रैक की साफ सफाई करने के एवज में इस कोयले को बेचने की वैधता बताती गयी और यह कोयला कांटा होने के लिए शारदा मंदिर के निकट कांटे पर जाता रहा और वहां से बनारस व ईट भट्ठा अथवा अन्य किसी भी व्यक्ति द्वारा खरीदे जाने के लिए इस कंपनी के संचालकों द्वारा वैध बताया जाता रहा जबकि इसी ट्रेन यार्ड पर दीपावली से कुछ दिन पूर्व जेसीबी समेत दो अन्य गाड़ियों को ओबरा थाना प्रशासन कुछ दिनों तक खड़ा रखे हुए थे और इस संबंध में थाना प्रशासन द्वारा भी कोई सूचना सामूहिक नहीं की गई थी बाद इसके यह और भी धड़ल्ले से बेचा जाने लगा इस मामले को लेकर क्या कोई बड़ा सिंडिकेट है ?अथवा कोयला माफियाओं का सोनभद्र के ओबरा में बड़े पैमाने पर पदार्पण हो चुका है? क्योंकि 100 टन कोयले का प्रतिदिन बेचा जाना ओबरा पावर प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो रहे कोयले की मात्रा और स्टेशन परिसर दोनों को संदिग्ध करती है। इसमें सम्मिलित सभी भ्रष्ट कर्मचारियों समेत उच्च अधिकारियों जैसे इसका टेंडर धनबाद अथवा अन्य रेलवे विभाग के किसी स्थान द्वारा स्वीकृत बताया गया और आपीएफ द्वारा भी इस पर कभी कोई रोक नहीं लगाया गया। किंतु ऐसा कोई भी पेपर नहीं दिखाया गया।मामला कुछ भी हो किंतु कोयला का बेचा जाना और रैक को खाली कराकर साफ सफाई कराना और इतनी बड़ी मात्रा का पावर प्रोजेक्ट में कमी न होना ये बातें आपस में सामंजस्य नहीं बनाती क्योंकि कोयल का स्टॉक और कोयले की मात्रा बेचे जाने वाली तथा कोयले का पावर प्रोजेक्ट में मात्र इस्तेमाल होना आपस में सामंजस नहीं स्थापित करती। इस खेल के पीछे कौन-कौन सम्मिलित हैं यह जल्द ही प्रकाश में लाया जाएगा इसके पूर्व भी बड़े कोयला चोरी का खुलासा हमारे समाचार पत्र द्वारा किया गया है जिसके लिए कंपनियों ने साधुवाद व धन्यवाद से स्वच्छ पत्रकारिता को सम्मानित किया है देखना यह है कि इस बड़े झोल में कितना बड़ा पोल है।





