ऊर्जाधानी पर  सबसे बड़ा हमला! काला सोना’ घोटाला: सिंगरौली की रेलवे पटरियों से अरबों की ‘राजस्व लूट’ की सुरंग!

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ऊर्जाधानी पर  सबसे बड़ा हमला! काला सोना’ घोटाला: सिंगरौली की रेलवे पटरियों से अरबों की ‘राजस्व लूट’ की सुरंग

माफियाओं का हाई-टेक सिंडिकेट सरकारी खजाने को कर रहा तबाह, क्या प्रशासन दिखाएगा साहस?

 

संपादक विवेक कुमार पाण्डेय 6264145214

देश को रौशनी देने वाली ‘एनर्जी कैपिटल’ सिंगरौली इस वक्त एक अभूतपूर्व आर्थिक अपराध के दलदल में फंसी है। रेलवे की साइडिंग (बरगवां, मोरवा, गोंदवाली) को लूट का अड्डा बनाकर, एक संगठित माफिया सिंडिकेट करोड़ों रुपये के राजस्व की खुली डकैती कर रहा है, जिसे ‘काला सोना’ घोटाला नाम दिया गया है।

 पटरियाँ बनीं ‘काले कारोबार’ का एक्सप्रेस-वे!

यह घोटाला इतना शातिर है कि यह सीधे तौर पर सरकारी खजाने पर किया गया सबसे बड़ा प्रहार माना जा रहा है। सूत्रों के मुताबिक, झारखंड से आ रहे निम्न-गुणवत्ता वाले चारकोल की खेपें इस ‘खेल’ का केंद्र हैं।

माफिया का ‘हाई-टेक’ फ्रॉड: 3 चरणों में देश से गद्दारी!

फ़र्ज़ीवाड़ा की फैक्ट्री: माफिया समूह जाली परमिट बनवाकर चारकोल को सतना या अन्य दूरस्थ जिलों के लिए बुक करवाते हैं। लेकिन कागज़ों पर दौड़ रही यह ट्रेन सीधे सिंगरौली की रेलवे साइडिंग पर आकर रुकती है—जो उनका अवैध ठिकाना है।

‘डस्ट का दानव’: रात के अंधेरे का फायदा उठाकर, इस घटिया चारकोल में भारी मात्रा में स्टोन डस्ट (भस्सी) मिलाई जाती है। यह मिलावट सिंगरौली के उच्च-गुणवत्ता वाले कोयले की छवि को धूमिल कर रही है।

दोगुना मुनाफा, देश को नुकसान: इस ज़हर-बुझे माल को फिर पावर प्लांट्स और उद्योगों को ऊंचे दामों पर बेचा जाता है। नतीजा? माफिया करोड़ों की अवैध कमाई कर रहा है, जबकि सरकार को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के राजस्व का भीषण नुकसान हो रहा है।

 सवाल: संरक्षण के साये में फल-फूल रहा है यह काला सिंडिकेट!

इस अवैध कारोबार का सबसे डरावना सत्य यह है कि यह वर्षों से बिना किसी भय के चल रहा है। प्रतीकात्मक कार्रवाईयां होती हैं, छोटे मोहरे पकड़े जाते हैं, लेकिन सिंडिकेट के मुख्य सरगना हमेशा पकड़ से बाहर रहते हैं।

 प्रशासन पर सीधा सवाल:

स्थानीय सफेदपोश नेताओं और भ्रष्ट अधिकारियों के ‘संरक्षण’ के बिना यह साम्राज्य कैसे खड़ा हो सकता है?

यह काला कारोबार न केवल सरकारी खजाने को लूट रहा है, बल्कि क्षेत्र के पर्यावरण को दूषित कर रहा है और ‘ऊर्जाधानी’ की गौरवशाली छवि पर भी कालिख पोत रहा है।

 अब समय आ गया है!

प्रशासन को अब अपनी चौंकाने वाली चुप्पी तोड़नी होगी। जनता की मांग है कि एक उच्च-स्तरीय, समयबद्ध जांच (SIT) तुरंत गठित की जाए, जो इस जालसाज़ी के रैकेट के छोटे मोहरे से लेकर बड़े, सफेदपोश चेहरों तक को बेनकाब करे और उन्हें कानून के शिकंजे में लाए।

क्या ‘ऊर्जाधानी’ का प्रशासन इस ‘राजस्व लूट की सुरंग’ को हमेशा के लिए बंद करने का साहस दिखा पाएगा?