खनिज अधिकारी की भूमिका पर उठ रहे सवाल सरई झारा

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क्रेशर झारा से काफी ओवरलोड गाड़ियां का गिट्टी छोड़ा जाता है बिना रोवाटी एवं बिना ढके काफी प्रदूषण

 

 

सिंगरौली   क्रेशरों की कथित अनियमितताओं के बीच खनिज विभाग की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में है। ग्रामीणों का कहना है कि विभागीय अधिकारियों को समय-समय पर मौके का निरीक्षण कर यह सुनिश्चित करना चाहिए कि लीज की शर्तों और खनन नियमों का पालन हो रहा है या नहीं। लेकिन आरोप है कि लंबे समय से प्रभावी जांच नहीं की गई। क्षेत्र में यह भी चर्चा है कि कुछ क्रेशर संचालकों और विभागीय अमले के बीच सांठगांठ के कारण कार्रवाई नहीं हो रही है तथा कथित रूप से ‘इंट्री फिक्स’ होने की बातें कही जा रही हैं। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ऐसे गंभीर आरोपों की निष्पक्ष जांच आवश्यक है, ताकि वास्तविक स्थिति सामने आ सके और यदि किसी स्तर पर भ्रष्टाचार या मिलीभगत साबित होती है तो संबंधित लोगों पर कार्रवाई हो।

 

जांच हुई तो खुल सकती है कई अनियमितताओं की परत

 

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि गड़ेरिया, मकरोहर सहित जिले के सभी क्रेशर क्षेत्रों में विशेष जांच अभियान चलाया जाए। जांच के दौरान लीज क्षेत्र की वास्तविक स्थिति, उत्खनन की सीमा, पर्यावरणीय मानकों का पालन, धूल नियंत्रण के इंतजाम, पौधरोपण और परिवहन व्यवस्था की जांच कराई जाए। ग्रामीणों का कहना है कि खनिज कारोबार से शासन को राजस्व मिलता है, लेकिन राजस्व अर्जित करने के साथ पर्यावरण और आम लोगों के स्वास्थ्य की सुरक्षा भी जरूरी है। यदि नियमों का उल्लंघन पाया जाता है तो संबंधित संचालकों पर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही जिम्मेदार अधिकारियों की भूमिका की भी जांच होनी चाहिए। अब देखना यह है कि ग्रामीणों की लगातार उठ रही शिकायतों के बाद जिला प्रशासन और खनिज विभाग मौके पर जांच के लिए कदम उठाता है या क्रेशर संचालन से जुड़ी शिकायतें सिर्फ आरोप-प्रत्यारोप तक ही सीमित रह जाती हैं।