O2 स्पा’ में देह व्यापार और गबन का खुलासा, फिर भी नवानगर पुलिस की चुप्पी दे रही अपराधियों को संरक्षण?

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सिंगरौली में कानून को ठेंगा! ‘O2 स्पा’ में देह व्यापार और गबन का खुलासा, फिर भी नवानगर पुलिस की चुप्पी दे रही अपराधियों को संरक्षण?

 

जिला सिंगरौली ऊर्जाधानी सिंगरौली में ‘खाकी’ के इकबाल पर बड़े सवालिया निशान खड़े हो रहे हैं। माजन मोड़ स्थित ‘O2 SPA’ की संचालिका द्वारा स्वयं उपस्थित होकर गंभीर धाराओं में शिकायत दर्ज कराने के बावजूद, नवानगर पुलिस का अब तक मुकदमा दर्ज न करना प्रशासनिक कार्यप्रणाली को संदिग्ध बना रहा है। आखिर ऐसी क्या मजबूरी है कि देह व्यापार और लाखों की धोखाधड़ी जैसे संगीन आरोपों के बाद भी पुलिस हाथ पर हाथ धरे बैठी है?

 

भरोसे का कत्ल और ‘काले धंधे’ का खेल

शिकायत के अनुसार, संचालिका शिवात्री चौहान ने दीपू नाई और पूनम चौहान नामक कर्मचारियों पर अटूट विश्वास जताया था, लेकिन बदले में उन्हें मिला ‘धोखा और दगा’। आरोप है कि इन कर्मचारियों ने संचालिका के एटीएम का अवैध रूप से उपयोग कर स्पा की मेहनत की गाढ़ी कमाई को खुर्द-बर्द कर दिया।

 

इतना ही नहीं, शिकायत में यह सनसनीखेज आरोप भी लगाया गया है कि स्पा सेंटर की आड़ में दिन-रात अवैध देह व्यापार का घिनौना खेल संचालित किया जा रहा है। जब संचालिका ने इसका विरोध किया, तो उनके साथ न केवल मारपीट की गई, बल्कि अश्लील गालियां देकर उन्हें अपमानित भी किया गया।

पुलिस की चुप्पी: लापरवाही या मिलीभगत?

सबसे बड़ा सवाल नवानगर पुलिस पर उठता है। शिकायत पत्र पर लगी थाने की मुहर इस बात का प्रमाण है कि पुलिस को मामले की पूरी जानकारी है।

 

सवाल 1: क्या देह व्यापार जैसे गंभीर आरोपों की जांच के लिए Alert को किसी ‘मुहूर्त’ का इंतजार है?

 

सवाल 2: क्या आरोपियों को बचाने के लिए राजनीतिक या आर्थिक दबाव काम कर रहा है?

सवाल 3: यदि संचालिका के साथ कुछ अनहोनी होती है, तो उसका जिम्मेदार कौन होगा?

 

प्रशासनिक शिथिलता से अपराधियों के हौसले बुलंद

 

आमतौर पर ऐसे मामलों में तत्काल FIR दर्ज कर जांच शुरू की जाती है, लेकिन यहाँ पुलिस की ‘कछुआ चाल’ अपराधियों को सबूत मिटाने और गवाहों को डराने का पूरा मौका दे रही है। यह स्थिति सिंगरौली पुलिस की “अपराध मुक्त समाज” की छवि को धूमिल कर रही है।

 

न्याय की गुहार

 

पीड़ित पक्ष का कहना है कि यदि स्थानीय स्तर पर सुनवाई नहीं हुई, तो वे SP सिंगरौली, रीवा आईजी और मुख्यमंत्री हेल्पलाइन (181) का दरवाजा खटखटाएंगे। अब देखना यह है कि क्या जिला प्रशासन इस मामले में हस्तक्षेप कर अपराधियों को जेल भेजता है या फिर नवानगर थाने की यह फाइल धूल फांकती रहेगी।