गुलाबी हाथों” ने खोल दी रिश्वतखोरी की पोल

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लोकायुक्त ने आदिवासी विकास विभाग का क्लर्क रंगे हाथ गिरफ्तार

 

 

मध्य प्रदेश के सिंगरौली जिले में भ्रष्टाचार के खिलाफ लोकायुक्त पुलिस ने बड़ी कार्रवाई करते हुए आदिवासी विकास विभाग में पदस्थ एक कनिष्ठ लिपिक (कलेक्ट्रेट कार्यालय) को रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। रीवा लोकायुक्त की इस कार्रवाई से पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में हड़कंप की स्थिति बन गई और विभागीय कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।

 

गिरफ्तार आरोपी की पहचान एम.एल. वर्मा के रूप में हुई है, जो आदिवासी विकास विभाग में कनिष्ठ लिपिक के पद पर कार्यरत था। आरोप है कि वह शासकीय बिलों के भुगतान और फाइल आगे बढ़ाने के एवज में लगातार रिश्वत की मांग कर रहा था।

 

लंबित बिलों के नाम पर वसूली का खेल

 

सूत्रों के अनुसार मामला विभाग के अंतर्गत कराए गए निर्माण कार्यों और सामग्री आपूर्ति से जुड़े भुगतान का था। शिकायतकर्ता के कई बिल लंबे समय से कार्यालय में लंबित पड़े थे।

 

पीड़ित का आरोप था कि बिल पास करने और भुगतान जारी करने के लिए आरोपी क्लर्क बार-बार रिश्वत मांग रहा था। लगातार हो रही मांग और कथित प्रताड़ना से परेशान होकर शिकायतकर्ता ने रीवा लोकायुक्त कार्यालय पहुंचकर लिखित शिकायत दर्ज कराई।

 

लोकायुक्त टीम ने शिकायत मिलने के बाद पहले पूरे मामले का गोपनीय सत्यापन कराया। जांच में रिश्वत मांगने की शिकायत सही पाए जाने के बाद ट्रैप कार्रवाई की योजना तैयार की गई।

 

दफ्तर में बिछा जाल, रिश्वत लेते ही दबोचा गया क्लर्क

 

लोकायुक्त पुलिस अधीक्षक के निर्देशन में गठित विशेष टीम ने योजनाबद्ध तरीके से कार्रवाई को अंजाम दिया। तय योजना के अनुसार शिकायतकर्ता रिश्वत की रकम लेकर आदिवासी विकास विभाग के कार्यालय पहुंचा।

 

जैसे ही आरोपी क्लर्क एम.एल. वर्मा ने रिश्वत की रकम अपने हाथ में ली, वैसे ही सादे कपड़ों में पहले से तैनात लोकायुक्त टीम ने उसे मौके पर ही दबोच लिया।

 

कार्रवाई इतनी अचानक हुई कि कार्यालय में मौजूद कई कर्मचारी अपनी सीट छोड़कर इधर-उधर होते नजर आए। लोकायुक्त की टीम ने मौके पर ही आरोपी से पूछताछ शुरू कर दी, जिससे पूरे कलेक्ट्रेट परिसर में सनसनी फैल गई।

 

“गुलाबी हाथों” ने खोल दी रिश्वतखोरी की पोल

 

गिरफ्तारी के बाद लोकायुक्त टीम ने आरोपी के हाथ केमिकल युक्त घोल से धुलवाए। जैसे ही आरोपी ने हाथ धोए, पानी का रंग गुलाबी हो गया।

 

लोकायुक्त अधिकारियों के अनुसार यह वैज्ञानिक परीक्षण इस बात का प्रत्यक्ष प्रमाण है कि आरोपी ने उन्हीं नोटों को छुआ था, जिन पर ट्रैप कार्रवाई से पहले विशेष रासायनिक पाउडर लगाया गया था।

 

इस कार्रवाई के दौरान मौके से रिश्वत की रकम भी बरामद की गई और पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई, ताकि अदालत में मजबूत साक्ष्य प्रस्तुत किए जा सकें।

 

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत केस दर्ज

 

गिरफ्तारी के बाद लोकायुक्त टीम आरोपी को आगे की कार्रवाई के लिए स्थानीय विश्राम गृह लेकर पहुंची, जहां कानूनी औपचारिकताएं पूरी की गईं।

 

आरोपी एम.एल. वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। लोकायुक्त पुलिस अब आरोपी की संपत्ति, विभागीय कार्यप्रणाली और अन्य संभावित लेनदेन की भी जांच कर सकती है।

 

विभागीय कार्रवाई की तैयारी, कर्मचारियों में दहशत

 

लोकायुक्त की इस कार्रवाई के बाद आदिवासी विकास विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। सूत्रों के मुताबिक गिरफ्तारी की आधिकारिक रिपोर्ट शासन और संबंधित विभाग को भेजी जा रही है, जिसके आधार पर आरोपी क्लर्क के निलंबन की प्रक्रिया भी शुरू की जा सकती है।

 

सिंगरौली जैसे औद्योगिक और भारी बजट वाले जिले में लंबे समय से सरकारी विभागों में भ्रष्टाचार के आरोप लगते रहे हैं। ऐसे में लोकायुक्त की इस कार्रवाई को प्रशासनिक तंत्र के लिए बड़ा संदेश माना जा रहा है कि रिश्वतखोरी के मामलों में अब सीधे और सख्त एक्शन की नीति अपनाई जा रही है।