सरकारी खजाने पर डाका!
ग्राम सभा घटिहटा में ‘खुली लूट’, आँखें मूंदकर होता रहा करोड़ों का भुगतान! क्या योगीराज में भी भ्रष्टाचारियों पर नहीं चलेगी ‘जीरो टॉलरेंस’ की तलवार?
संपादक विवेक कुमार पाण्डेय 6264145214
सोनभद्र के चोपन विकासखंड की ग्राम सभा घटिहटा इस समय भ्रष्टाचार के ज्वालामुखी के मुहाने पर खड़ी है। यहां ग्राम विकास योजनाओं के लिए आवंटित सरकारी धन की ‘खुली लूट’ का सनसनीखेज मामला सामने आया है। स्थानीय निवासी श्री रोहित तिवारी ने शासन-प्रशासन की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए, घोटाले के पुख्ता सबूतों के साथ एक बड़ा मोर्चा खोल दिया है।
मामला इतना गंभीर क्यों?
शिकायतकर्ता रोहित तिवारी का आरोप है कि घटिहटा में उन मदों में लगातार वर्षों तक भुगतान होता रहा, जिनकी जांच करने की भी जरूरत नहीं थी— भ्रष्टाचार इतना स्पष्ट था कि सीधे ‘लूट’ दिखाई दे रही थी!
चौंकाने वाला आरोप: यह खुली लूट कथित तौर पर कई वर्षों तक निर्बाध रूप से जारी रही।
अधिकारियों की भूमिका पर संदेह: तिवारी जी का कहना है कि संबंधित जांच अधिकारी गण इस खुले बंदरबांट को रोकने के बजाय, चुपचाप भुगतान होने देते रहे। उनकी यह खामोशी उनके भी इस ‘खेल’ में शामिल होने की ओर इशारा करती है।
न्याय के लिए ‘महाभारत’
महलपुर निवासी रोहित तिवारी ने इस महाघोटाले के तमाम साक्ष्य जुटाए हैं और न्याय के लिए जिलाधिकारी, जिला पंचायत राज अधिकारी, ग्राम सचिव, और सीधे माननीय मुख्यमंत्री तक लगातार शिकायतें भेजी हैं। उन्होंने समाचार पत्रों के माध्यम से भी सरकारी धन की इस लूट का खुलासा किया है।
उनका संकल्प स्पष्ट है:
सरकारी धन का यह बंदरबांट किसी भी कीमत पर रुकना चाहिए।
भुगतान किया गया समस्त धन वापस सरकारी खाते में जमा कराया जाए।
दोषियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई हो।
“इतने अधिकारियों में शायद कोई ईमानदार अधिकारी होगा,” इस उम्मीद के साथ वे बार-बार गुहार लगा रहे हैं, और यदि प्रशासन ने आंखें मूंदे रखीं, तो वह न्यायालय का दरवाजा खटखटाने के लिए भी पूरी तरह तैयार हैं।
योगी सरकार की ‘अग्निपरीक्षा‘
यह मामला सीधे तौर पर माननीय मुख्यमंत्री की जीरो टॉलरेंस की नीति को चुनौती दे रहा है।
सवाल बड़ा है: क्या ग्राम सभा घटिहटा में भी कोई ईमानदार और निष्पक्ष अधिकारी इन भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कार्रवाई करेगा? या फिर, मुख्यमंत्री को स्वयं इस मामले का संज्ञान लेकर, इस खुली लूट पर लगाम लगानी पड़ेगी?
प्रदेश की जनता और शिकायतकर्ता रोहित तिवारी अब यह देखने के लिए उत्सुक हैं कि जीरो टॉलरेंस की नीति केवल कागजों पर है, या वास्तव में सरकारी खजाने को लूटने वालों पर बड़ा प्रहार करती है!





