हाईकोर्ट ने मेहताब उर्फ कल्लू को किया बरी, पहले ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा

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हाईकोर्ट ने मेहताब उर्फ कल्लू को किया बरी, पहले ट्रायल कोर्ट ने सुनाई थी आजीवन कारावास की सजा

 

 

 

 

मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय की जबलपुर खंडपीठ ने सिंगरौली जिला अंतर्गत मोरवा क्षेत्र के चर्चित नाबालिक से दुष्कर्म (पॉक्सो एक्ट) के मामले में आरोपी मेहताब उर्फ कल्लू मुसलमान को सभी आरोपों से बरी कर दिया है। अदालत ने माना कि मामले में डीएनए साक्ष्यों की *“चेन ऑफ कस्टडी”* सुरक्षित नहीं रखी गई, जिससे सबूतों की विश्वसनीयता संदेह के घेरे में आ गई।

गौरतलब है कि वर्ष 2021 का यह मामला पहले भी न्यायिक प्रक्रिया में गंभीर सवाल खड़े कर चुका था। वर्ष 2025 में हाईकोर्ट ने तत्कालीन विशेष पॉक्सो न्यायाधीश के फैसले को निरस्त करते हुए मामला दोबारा ट्रायल कोर्ट भेजा था। उस दौरान हाईकोर्ट ने पाया था कि ट्रायल कोर्ट ने आरोपी से धारा 313 सीआरपीसी के तहत डीएनए रिपोर्ट से जुड़े महत्वपूर्ण सवाल ही नहीं पूछे। इसे *न्यायिक प्रक्रिया में “बड़ी चूक”* मानते हुए अदालत ने पोस्को के तत्कालीन विशेष न्यायाधीश की कार्यप्रणाली और क्षमता की जांच के निर्देश भी दिए थे।

 

इसके बाद मामला पुनः ट्रायल कोर्ट में चला, जहां आरोपी को दोबारा दोषी ठहराया गया। इस फैसले को चुनौती देते हुए आरोपी ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। मामले की सुनवाई करते हुए न्यायमूर्ति विवेक अग्रवाल और न्यायमूर्ति अवनिंद्र कुमार सिंह की खंडपीठ ने 4 मई 2026 को आरोपी को दोषमुक्त कर दिया है।

 

अदालत ने कहा कि पीड़िता के कपड़े और अन्य फॉरेंसिक नमूने 3 फरवरी 2021 को लिए गए थे, लेकिन उन्हें चार दिन बाद 7 फरवरी को जमा कराया गया। इस दौरान नमूनों की सुरक्षा को लेकर कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं मिला। अदालत ने माना कि इस स्थिति में साक्ष्यों से छेड़छाड़ की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। मेडिकल परीक्षण में भी पीड़िता के शरीर पर किसी प्रकार की चोट नहीं मिली। वहीं, पीड़िता के परिवार के नाबालिग गवाहों ने बयान दिया कि आरोपी और पीड़िता की मां के बीच संबंध थे तथा घटना वाले दिन दोनों के बीच विवाद हुआ था। अदालत ने इन तथ्यों को अभियोजन की कहानी के विपरीत माना।

 

बताते चलें कि मामले की विवेचना तत्कालीन निरीक्षक मनीष त्रिपाठी के कार्यकाल में उपनिरीक्षक रूपा अग्निहोत्री द्वारा की गई थी। वहीं हाईकोर्ट में आरोपी पक्ष की पैरवी मोरवा निवासी अधिवक्ता अविनाश सोनी ने की।