आज़ादी के 76 साल बाद भी सड़क नहीं, बीमार को चरपाई पर कंधों में उठाकर ले जाने को मजबूर ग्रामीण

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आज़ादी के 76 साल बाद भी सड़क नहीं, बीमार को चरपाई पर कंधों में उठाकर ले जाने को मजबूर ग्रामीण

संवाददाता ज्ञानेश्वर पाण्डेय

मध्यप्रदेश के सिंगरौली जिले की देवसर विधानसभा से विकास की हकीकत को उजागर करने वाली एक शर्मनाक तस्वीर सामने आई है। आज़ादी के 76 वर्ष बीत जाने के बावजूद देवसर विधानसभा क्षेत्र के ग्राम खनुआ नया में आज तक पक्की सड़क का निर्माण नहीं हो सका है। सड़क के अभाव में ग्रामीणों को आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

ताज़ा मामला उस समय सामने आया जब गांव के एक बीमार व्यक्ति को इलाज के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा। सड़क न होने के कारण एम्बुलेंस या कोई अन्य वाहन गांव तक नहीं पहुंच सका। मजबूरन परिजनों और ग्रामीणों ने मरीज को चरपाई पर लिटाकर कंधों पर उठाकर कई किलोमीटर दूर तक पैदल ले जाया। यह दृश्य प्रशासनिक दावों और जमीनी हकीकत के बीच की खाई को साफ दिखाता है।

ग्रामीणों का कहना है कि उन्होंने कई बार पंचायत, जनपद और प्रशासनिक अधिकारियों के साथ-साथ जनप्रतिनिधियों को भी सड़क निर्माण की मांग से अवगत कराया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। बरसात के मौसम में हालात और भी बदतर हो जाते हैं, तब गांव का संपर्क पूरी तरह कट जाता है।

उल्लेखनीय है कि यह क्षेत्र देवसर विधानसभा के अंतर्गत आता है, जहां से विधायक राजेंद्र मेश्राम निर्वाचित हैं। बावजूद इसके, गांव के लोग आज भी बुनियादी सड़क जैसी सुविधा से वंचित हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है कि विकास योजनाएं कागजों में तो दिखाई देती हैं, लेकिन जमीन पर उनकी तस्वीर बिल्कुल अलग है।

ग्रामीणों ने जिला प्रशासन और जनप्रतिनिधियों से मांग की है कि खनुआ नया गांव तक तत्काल सड़क निर्माण कराया जाए, ताकि भविष्य में किसी मरीज, गर्भवती महिला या बुजुर्ग को इस तरह जान जोखिम में डालकर ढोना न पड़े।

यह घटना न केवल स्थानीय प्रशासन बल्कि पूरे सिस्टम के लिए एक गंभीर सवाल खड़ा करती है कि आखिर कब तक ग्रामीण इस तरह की उपेक्षा और बदहाली झेलते रहेंगे।