ऊर्जाधानी’ बनी ‘मौत की राजधानी’! ट्रैफिक की बेलगाम रफ्तार, क्या प्रशासन को ‘बड़ा हादसा’ ही जगाएगा?

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ऊर्जाधानी’ बनी ‘मौत की राजधानी’! ट्रैफिक की बेलगाम रफ्तार, क्या प्रशासन को ‘बड़ा हादसा’ ही जगाएगा?

 

संपादक विवेक कुमार पाण्डेय 6264145214

जिला सिंगरौली। देश को रौशनी देने वाली ‘ऊर्जाधानी’ सिंगरौली अब अपनी बदहाल और ध्वस्त ट्रैफिक व्यवस्था के कारण ‘खतरे की राजधानी’ में तब्दील हो चुकी है! शहर की सड़कें अब सिर्फ आने-जाने का रास्ता नहीं, बल्कि ‘मौत का तांडव’ स्थल बन चुकी हैं, जहाँ हर पल एक भयानक दुर्घटना का खतरा मंडरा रहा है।

सिंगरौली, जो अपनी औद्योगिक क्षमता के लिए जानी जाती है, आज बेलगाम और अनियंत्रित यातायात के कारण खौफ का पर्याय बन गई है। यह स्थिति न केवल नागरिकों की जान-माल के लिए खतरा है, बल्कि प्रशासन की घोर लापरवाही पर भी सीधा प्रश्नचिह्न लगाती है।

 

🛑 खतरे की लाल बत्ती: सिर्फ एक मज़ाक!

शहर के चौक-चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइटें (लाल बत्ती) अब महज शोपीस बनकर रह गई हैं। यह लाल सिग्नल, जो नियम और सुरक्षा का प्रतीक होना चाहिए था, अब वाहन चालकों के लिए ‘लाइसेंस टू किल’ और खुली लापरवाही का न्योता बन गया है।

खुली अवहेलना: प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लाल बत्ती जलने पर भी वाहन चालक ‘धड़ल्ले’ से नियम तोड़ते हुए आगे बढ़ते हैं। यह सिर्फ नियम का उल्लंघन नहीं, बल्कि यह जनता की जान को सीधे खतरे में डालना है।

हर पल हादसा: शहर के व्यस्ततम मोड़ों पर दिनभर ‘अफरा-तफरी’ का माहौल रहता है, जहाँ आम जनता को अपनी जान बचाकर निकलना पड़ रहा है।

 

प्रश्न: सवाल यह है कि इस गंभीर खतरे को देखते हुए भी, यातायात कंट्रोल रूम क्यों फेल है? क्या किसी बड़े हादसे का इंतज़ार किया जा रहा है, ताकि प्रशासन की नींद खुले?

 

👥 प्रभारी की चुप्पी पर सीधा आरोप: क्यों ध्वस्त है सिस्टम?

स्थानीय नागरिकों का आक्रोश अब केवल सवाल नहीं उठा रहा, बल्कि यह सीधा आरोप है। उनकी आँखों के सामने यह बदहाली है, फिर भी यातायात प्रभारी और उनकी टीम इस ध्वस्त सिस्टम को दुरुस्त करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। नियमों के उल्लंघन पर कोई ठोस कार्रवाई न होने से लापरवाह चालकों के हौसले बुलंद हैं।

 

💰 ‘वसूलीबाज’ वर्दी और VIP ड्यूटी: आंतरिक भ्रष्टाचार का जाल!

खबर का दूसरा और अधिक गंभीर पहलू ट्रैफिक थाने के आंतरिक प्रबंधन पर सवाल खड़ा करता है, जहाँ ‘मनमानी’ का साम्राज्य है और कथित आंतरिक भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप हैं:

‘वर्दी में वसूलीबाज’: यातायात थाने के दो प्रधान आरक्षकों (चौबे और चौहान) पर गंभीर आरोप है कि वे हमेशा ड्यूटी पर खाकी वर्दी में जमे रहते हैं और मुंशी बागरी के माध्यम से मनमानी ड्यूटी लगवाते हैं। यह कार्यशैली विभाग की पारदर्शिता पर गंभीर संदेह पैदा करती है।

 

सौतेला व्यवहार: आरोप है कि मुंशी बागरी के साथ दो स्टाफ को छोड़कर, अन्य सभी कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है।

 

समाप्त भय/डर: यह स्थिति साफ दर्शाती है कि यातायात विभाग में रोटेशन की नीति और वरिष्ठ अधिकारी का डर लगभग समाप्त हो चुका है, जिसके कारण मनमानी और कथित ‘वसूली’ को बल मिल रहा है।

 

📢 जनता की दो टूक मांग: अब निर्णायक कार्रवाई हो!

सिंगरौली में पहले से ही भारी वाहनों (डंपर, ट्रक) का बेलगाम प्रवेश एक विकराल समस्या है। ऐसे में ‘लाल बत्ती’ का बेअसर होना छोटे वाहनों और आम जनता के लिए जानलेवा है।

 

सिंगरौली की जनता प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से तत्काल और कठोर हस्तक्षेप की मांग करती है:

कठोर नियम लागू हों: ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर तत्काल भारी जुर्माना लगाया जाए और सख्ती से नियम लागू हों। ‘लाल बत्ती’ को उसका असली मतलब वापस मिले!

 

जाँच और दंडात्मक कार्रवाई: यातायात थाने के अंदरूनी अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच हो, और मनमानी ड्यूटी/कथित वसूली में संलिप्त सभी अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई की जाए।

 

सिंगरौली प्रशासन को यह समझना होगा कि एक छोटी सी चूक यहाँ किसी की जान ले सकती है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर अब जनता को इस ‘मौत के तांडव’ से मुक्ति मिलेगी?