ओबरा डैम पर कोयला चोरी धड़ल्ले से! एंपटी रैक की साफ सफाई के नाम पर हो रहा है कोयला चोरी!

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ओबरा डैम पर कोयला चोरी धड़ल्ले से! एंपटी रैक की साफ सफाई के नाम पर हो रहा है कोयला चोरी!

 

संपादक विवेक कुमार पाण्डेय 6264145214

ओबरा/ सोनभद्र। लगभग चार माह पूर्व से चल रहे ओबरा डैम पर गोरख धंधे को वैध बताते हुए ऐडवन कंपनी का नाम सामने आया है । इस गोरख धंधे में बिजली उत्पादन के लिए आए कोयल की रैकों की साफ सफाई करने के नाम पर बड़े पैमाने पर कोयला बेचा जा रहा है लगभग 100 टन प्रतिदिन कोयला बेचा जा रहा है जबकि यदि 100 टन कोयला रेक में बच जाता है तो तो यही मात्रा की कमी ओबरा पावर प्लांट को भी होनी चाहिए किंतु ऐसी कोई बात सामने नहीं आ रही है क्योंकि जब स्टेशन यार्ड पर ही कोयला बड़े पैमाने पर रखा गया है और यह बताया जा रहा है कि यह कोयला एंपटी रैक से निकला गया है जबकि लगभग 4 से 5 गाड़ी यानी लगभग 100 टन कोयला प्रतिदिन बेचा जा रहा है आए दोनों नगर वासियों द्वारा शारदा मंदिर से बग्घा नाला के बीच इन कोयल की गाड़ियों को देखा गया है और स्थानीय लोगों द्वारा बताया भी गया है कि लगभग चार से पांच गाड़ी प्रतिदिन कोयला बेचा जा रहा है उसके बावजूद इतना बड़ा कोयला भंडारण मौजूद है वहां उपस्थित रेलवे कर्मचारी व कार्य कर रहे मजदूरों द्वारा नागपुर की एक कंपनी एडवन का नाम लिया गया जो कोयल के एम्टी रैक को खाली करने के नाम पर साफ सफाई करने के एवज में इस कोयले को बेचने की वैधता बताती है और यह कोयला कांटा होने के लिए शारदा मंदिर के निकट कांटे पर जाता है और वहां से बनारस ईट भट्ट अथवा अन्य किसी भी व्यक्ति द्वारा खरीदे जाने के लिए इस कंपनी के संचालकों द्वारा वैध बताया जाताहै जबकि इसी ट्रेन यार्ड पर दीपावली से कुछ दिन पूर्व जेसीबी समेत दो अन्य गाड़ियों को ओबरा थाना प्रशासन कुछ दिनों तक खड़ा रखे हुए थे और इस संबंध में थाना प्रशासन द्वारा कोई भी सूचना सामूहिक नहीं की गई थी बाद इसके यह और भी धड़ल्ले से बेचा जाने लगा इस मामले को लेकर क्या कोई बड़ा सिंडिकेट है ?अथवा कोयला माफियाओं का सोनभद्र के ओबरा में बड़े पैमाने पर पदार्पण हो चुका है? क्योंकि 100 टन कोयले का प्रतिदिन बेचा जाना ओबरा पावर प्रोजेक्ट में इस्तेमाल हो रहे कोयल की मात्रा और स्टेशन परिसर दोनों को संदिग्ध करती है। इसमें सम्मिलित सभी भ्रष्ट कर्मचारियों समेत उच्च अधिकारियों जैसे की मौजूद लोगों ने इसका टेंडर धनबाद अथवा अन्य रेलवे विभाग के किसी स्थान द्वारा स्वीकृत बताया है और आपीएफ द्वारा भी इस पर कभी कोई रोक नहीं लगाया गया। किंतु ऐसा कोई भी पेपर नहीं दिखाई मामला कुछ भी हो किंतु कोयला का बेचा जाना और रैक को खाली कराकर साफ सफाई कराना और इतनी बड़ी मात्रा का पावर प्रोजेक्ट में कमी न होना ये बातें आपस में सामंजस्य नहीं बनाती क्योंकि कोयल का स्टॉक और कोयले की मात्रा बेचे जाने वाली तथा कोयले का पावर प्रोजेक्ट में मात्र इस्तेमाल होना आपस में सामंजस नहीं स्थापित करती। इस खेल के पीछे कौन-कौन सम्मिलित हैं यह जल्द ही प्रकाश में लाया जाएगा इसके पूर्व भी बड़े कोयला चोरी का खुलासा हमारे समाचार पत्र द्वारा किया गया है जिसके लिए कंपनियों ने साधुवाद व धन्यवाद से स्वच्छ पत्रकारिता को सम्मानित किया है देखना यह है कि इस बड़े झोल में कितना बड़ा पोल है।