बंधा कोल माइंस रात के अंधेरे में भूमि पूजन करने गए कंपनी के लोगों को ग्रामीणों ने खदेड़ा
बंधा में ग्रामीणों का जंगल में रतजगा विरोध, कहा ‘पहले मुआवजा फिर काम’
सिंगरौली जिले के बंधा गांव में एस्सेल माइनिंग एन्ड इंडस्ट्रीज लिमिटेड (ईएमआईएल ) द्वारा प्रस्तावित भूमि पूजन कार्यक्रम का ग्रामीणों ने भारी विरोध कर दिया हैl बताया जाता है कि 30 और 31 मार्च को होने वाले इस कार्यक्रम को लेकर गांव में तनाव की स्थिति बन गई है। प्रभावित ग्रामीण रात-रात जागकर जंगल की रखवाली करने लगे हैl ग्रामीणों का साफ कहना है कि जब तक विस्थापितों की सूची सार्वजनिक नहीं की जाती और मुआवजे की स्पष्ट जानकारी नहीं दी जाती, तब तक किसी भी प्रकार का भूमि पूजन या परियोजना का कार्य नहीं होने दिया जाएगा। कोल माइंस के लिए प्रस्तावित बंधा गांव के ग्रामीण कंपनी प्रबंधन की मनमानी कार्यप्रणाली को लेकर जंगल में रतजगा करने को मजबूर हो गए हैl
पहले मुआवजा, फिर जमीन
ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कंपनी बिना पूर्व सूचना दिए रात के समय भूमि पूजन करने पहुंची, जिससे लोगों में आक्रोश फैल गया। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया पूरी तरह अपारदर्शी है और इससे ग्रामीणों के अधिकारों का हनन हो रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि उनकी मुख्य मांगें है कि जिला प्रशासन और कंपनी प्रबंधन पहले मुआवजा की सूचि सार्वजनिक करें, फिर मुआवजा वितरण किया जायl जिसमे भूमि अधिग्रहण क़ानून को पारदर्शिता के साथ पालन करेंl जिससे विस्थापित ग्रामीणों में विस्वास पैदा होl भय और डंडे के बलबूते जमीन जंगल पर चोरी छिपे कब्ज़ा करने का अनुचित प्रयास बेहद निंदनीय और अलोकतान्त्रिक हैl
विस्थापितों की पूरी सूची सार्वजनिक की जाएl
प्रत्येक प्रभावित परिवार को मिलने वाले मुआवजे की स्पष्ट जानकारी दी जाएl बिना सहमति किसी भी प्रकार का कार्य न किया जाएl
विरोध के दौरान बढ़ा तनाव
ग्रामीणों का आरोप है कि विरोध के दौरान कंपनी से जुड़े कुछ लोगों ने माहौल को उग्र बनाने की कोशिश की, जिससे स्थिति तनावपूर्ण हो गई। हालांकि, ग्रामीणों ने एकजुट होकर भूमि पूजन को रोक दिया है।
प्रशासन पर टिकी निगाहें
इस पूरे मामले में स्थानीय प्रशासन और की भूमिका अहम मानी जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि शीघ्र समाधान नहीं निकला तो आंदोलन और तेज किया जाएगाl हालांकि इस सम्बन्ध में कंपनी प्रबंधक से उनका पक्ष जानने का प्रयास गया लेकिन संपर्क नहीं हो पायाl





