गजरा बहरा पंचायत में फर्जी हस्ताक्षर से राशि निकासी का आरोप दसवीं बार कलेक्टर एसपी आखिर क्यों नहीं कर रहे हैं कार्रवाई पीड़ित
जिला सिंगरौली। जिला मुख्यालय 50 किलोमीटर दूर की जनसुनवाई व्यवस्था आमजन को त्वरित न्याय दिलाने के उद्देश्य से संचालित होती है, लेकिन जब एक ही शिकायत लेकर कोई व्यक्ति दसवीं बार कलेक्टर एसपी कार्यालय की चौखट पर पहुंचे और फिर भी ठोस जांच न हो, तो सवाल उठना स्वाभाविक है। ग्राम पंचायत गजरा बहरा, तहसील सरई, जनपद देवसर निवासी विष्णु कुमार वर्मा का मामला इसी व्यवस्था की कार्यप्रणाली पर प्रश्नचिह्न खड़ा कर रहा है। आवेदक का आरोप है कि उनके पिता के फर्जी हस्ताक्षर कर पंचायत गजरा बहरा द्वारा मेंड़ बंधान योजना की राशि सहमति पत्र के आधार पर निकाल ली गई वर्ष 2024 से लगातार लिखित शिकायतें देने के बावजूद न तो स्थल निरीक्षण हुआ और न ही जिम्मेदारों से जवाब-तलब हर बार कागजों में निराकरण दर्शाकर प्रकरण बंद कर दिया जाता है सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि मुख्यमंत्री हेल्पलाइन में की गई शिकायत भी तीसरे-चौथे स्तर पर पहुंचते ही स्वतः बंद हो गई। यदि शिकायतकर्ता की बात में दम नहीं था तो पारदर्शी जांच कर तथ्य सामने रखे जाते, और यदि आरोप सही हैं तो कार्रवाई क्यों नहीं? जब एक नागरिक दसवीं बार जनसुनवाई में पहुंचकर न्याय की गुहार लगा रहा हो, तो यह केवल एक व्यक्ति की पीड़ा नहीं, बल्कि पूरी प्रशासनिक संवेदनशीलता की परीक्षा है। सवाल यह उठता है कि क्या अधिकारी शिकायतों को गंभीरता से लेने के बजाय औपचारिकता निभाने तक सीमित हो गए हैं? या फिर कहीं न कहीं व्यवस्था में ऐसी खामियां हैं जो दोषियों को संरक्षण दे रही हैं? जनसुनवाई का उद्देश्य भरोसा कायम करना है, न कि निराशा बढ़ाना यदि जांच बिना मौके पर गए और बिना तथ्यों की पड़ताल के ही पूरी मान ली जाए, तो यह व्यवस्था की विश्वसनीयता पर आंच है अब देखना यह होगा कि जिला कलेक्टर एसपी इस मामले में निष्पक्ष जांच कर वास्तविकता सामने लाता है या फिर यह शिकायत भी फाइलों में दफन होकर रह जाएगी जनता की निगाहें प्रशासनिक कार्रवाई पर टिकी हैं।




