पुजारी हत्याकांड के आरोपी पर प्रशासन का ‘वज्रपात’, पाप की लंका अवैध साम्राज्य हुई सील
कुसमी (सीधी): धर्म की रक्षा और न्याय की स्थापना का शंखनाद हो चुका है। सीधी जिले के कुसमी में हनुमान मंदिर के वयोवृद्ध पुजारी इन्द्रभान द्विवेदी की जघन्य हत्या ने जहाँ पूरे प्रदेश की आत्मा को झकझोर दिया था, वहीं अब प्रशासन ने ‘काल’ बनकर अपराधी के अवैध साम्राज्य पर प्रहार किया है। कायरतापूर्ण हमले से जनमानस में उपजे आक्रोश के बीच, शासन ने स्पष्ट संदेश दिया है कि देवतुल्य पुजारी के रक्त की हर बूंद का हिसाब कानून की कठोरता से लिया जाएगा।
पाप की दुकान पर चला न्याय का ताला
शौर्य और न्याय का परिचय देते हुए प्रशासनिक अमले ने रविवार को आरोपी कामता प्रसाद उर्फ लाला केवट के विरुद्ध निर्णायक कार्रवाई की। जिस अवैध कमाई और अहंकार के दम पर उसने 75 वर्षीय निहत्थे पुजारी पर वार किया था, उसी अहंकार को कुचलते हुए प्रशासन ने आरोपी के अवैध घर और मुर्गा-अंडा दुकान को पूरी तरह सील कर दिया है। यह कार्रवाई उस मानसिकता पर तमाचा है जो समझती है कि वे कानून से ऊपर हैं।
रक्त रंजित सड़क और कायरता का परिचय
ज्ञात हो कि 75 वर्षीय इन्द्रभान द्विवेदी, जो वर्षों से हनुमान लला की सेवा में लीन थे, उन पर उस समय पीठ पीछे हमला किया गया जब वे मंदिर से लौट रहे थे। उस नराधम ने चलती
मोटरसाइकिल पर एक वृद्ध संत की गर्दन पर प्रहार किया और फिर निर्दयता की सारी हदें पार करते हुए उनके सीने को छलनी कर दिया। इस कायरतापूर्ण कृत्य ने कुसमी की धरती को लहूलुहान कर दिया था।
न्याय की हुंकार और ‘आर्थिक कवच’
इस जघन्य कृत्य के बाद जब परिजनों और ग्रामीणों का धैर्य अनशन के रूप में न्याय की मांग करने लगा, तब प्रशासन ने न केवल अपराधी को उसकी औकात दिखाई, बल्कि पीड़ित परिवार के आँसू पोंछने के लिए 50 लाख रुपये की भारी-भरकम आर्थिक सहायता की घोषणा भी की। यह राशि केवल सहायता नहीं, बल्कि उस सम्मान का प्रतीक है जो शासन अपने संतों और नागरिकों के प्रति रखता है।
“अपराध का साम्राज्य चाहे कितना भी ऊंचा क्यों न हो, न्याय की चौखट के आगे उसे झुकना ही पड़ता है। कुसमी की यह कार्रवाई अन्य अपराधियों के लिए एक चेतावनी है।” प्रशासनिक संदेश
निष्कर्ष: निर्दोष का रक्त बेकार नहीं जाएगा
प्रशासन की इस त्वरित और कठोर कार्रवाई ने यह सिद्ध कर दिया है कि गुंडागर्दी और अधर्म के विरुद्ध ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति अटल है। अवैध दुकानों को सील करना तो महज शुरुआत है; अब समाज की मांग है कि उस हत्यारे को ऐसी सजा मिले जो इतिहास में एक नजीर बन जाए।





