पर स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग की खामोशी कमाल साहबों को मालामाल कर रही!
सरई कोल यार्ड में रेलवे, खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन की तिकड़ी! 4.80 लाख टन की अनुमति पर 30 लाख टन कोयले का अवैध खेल, जनता की सेहत से खिलवाड़!

सिंगरौली | सरई ग्राम (SGAM) रेलवे स्टेशन पर चल रहा कोल यार्ड का काला कारोबार अब सिर्फ एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि प्रशासनिक सरपरस्ती का बड़ा उदाहरण बन चुका है। RTI से मिले दस्तावेजों ने साफ कर दिया है कि मध्य प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (MPPCB) ने यहाँ सालाना केवल 4.80 लाख मीट्रिक टन कोयला परिवहन की इजाजत दी थी, लेकिन धरातल पर 25 से 30 लाख मीट्रिक टन कोयला धड़ल्ले से ढोया जा रहा है।
पश्चिम मध्य रेल के वाणिज्य विभाग ने इस यार्ड से ₹122.59 करोड़ से अधिक का माल भाड़ा तो वसूल लिया, लेकिन सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया। सबसे बड़ा सवाल तो जिले के स्थानीय प्रशासन और खनिज विभाग पर उठता है—क्या सरई से गुजरते कोयले से भरे सैकड़ों ओवरलोड ट्रकों पर खनिज अधिकारी की नजर नहीं पड़ती? या फिर सब कुछ जानते हुए भी ‘मौन स्वीकृति’ दी गई है?
यात्री प्लेटफॉर्म पर अवैध कब्जा
मैसर्स एसीसी, अंबुजा और ईस्ट वैली जैसी कंपनियों के मुनाफे के लिए प्लेटफॉर्म नंबर 2 पर कोयले का पहाड़ खड़ा कर दिया गया है। यात्री जानलेवा धूल फांकने को मजबूर हैं, पर स्थानीय प्रशासन चुप क्यों है?
खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल
बिना पर्याप्त वाटर कैनन, मिस्ट फॉगर और तिरपाल के हो रहे इस भारी परिवहन पर माइनिंग विभाग ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई क्यों नहीं की?
जहरीला होता भूजल
खुले में डंप कोयले के रिसाव से सरई का भूजल दूषित हो रहा है, लोग गंभीर बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं।
कांग्रेस नेता अरुण जायसवाल द्वारा RTI खुलासे के बाद अब उग्र जन-आंदोलन और NGT (नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल) जाने की तैयारी है।






