सिंगरौली की सड़कों पर खून बहना कब बंद होगा?”

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सिंगरौली की सड़कों पर खून बहना कब बंद होगा?

 

 

 

सिंगरौली जिले की सड़कें अब केवल डामर की पट्टी नहीं, बल्कि निर्दोषों के खून से सनी ‘कत्लगाह’ बन चुकी हैं। ताजा मामला खुटार चौकी के ठीक सामने का है, जहाँ एक तेज रफ्तार काल बने हाइवा ने 30 वर्षीय शिव कुमार केवट को अपनी चपेट में ले लिया। युवक की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई, लेकिन इस मौत से ज्यादा दर्दनाक रहा प्रशासन का वह चेहरा, जो जनता को सांत्वना देने के बजाय कैमरों से मुंह छिपाता नजर आया।

 

तहसीलदार साहिबा! जवाबदेही से कब तक भागेंगी?

 

हादसे के बाद जब आक्रोशित ग्रामीणों ने हंगामा किया, तो मौके पर तहसीलदार प्रीति सिकरवार पहुँचीं। एक जिम्मेदार अधिकारी से उम्मीद थी कि वह शोकाकुल परिवार को न्याय का भरोसा देंगी और भविष्य में ऐसे हादसों को रोकने के लिए ठोस कदम उठाएंगी।

 

तल्ख हकीकत: मीडिया ने जब तीखे सवाल पूछे और मृत युवक के हक की बात की, तो तहसीलदार महोदया अपनी जवाबदेही तय करने के बजाय ‘गोल-मोल’ जवाब देकर पल्ला झाड़ती दिखीं। वीडियो और प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, वह सवालों का सामना करने के बजाय वहां से ‘भागती’ नजर आईं। क्या सिंगरौली का प्रशासन इतना लाचार हो गया है कि वह जनता के सवालों का सामना तक नहीं कर पा रहा?

 

सवालों के घेरे में सिंगरौली पुलिस और प्रशासन

खुटार चौकी के बिल्कुल सामने यह हादसा होना पुलिस की मुस्तैदी पर भी बड़ा प्रश्नचिह्न लगाता है। क्या भारी वाहनों (हाइवा) की रफ्तार पर लगाम लगाने वाला कोई नहीं है क्या गरीबों की जान की कीमत केवल चंद रुपयों का मुआवजा है आखिर कब तक जिम्मेदार अधिकारी जनता के प्रति इतने संवेदनहीन बने रहेंगे?

 

सत्ता और विपक्ष तक गूँज

 

यह मामला अब केवल एक दुर्घटना नहीं, बल्कि प्रशासनिक विफलता का जीता-जागता प्रमाण है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के सुशासन के दावों के बीच, सिंगरौली के धरातल पर अधिकारी अपनी जिम्मेदारी से भाग रहे हैं।

 

विपक्ष के नेता जीतू पटवारी और डॉ. विक्रांत भूरिया जैसे नेताओं को भी इस मुद्दे पर घेरते हुए ग्रामीण पूछ रहे हैं कि— “सिंगरौली की सड़कों पर खून बहना कब बंद होगा?”

 

शिव कुमार केवट की मौत एक परिवार का चिराग बुझना है। अगर जिम्मेदार अधिकारी इसी तरह सवालों से भागते रहे और हाइवा चालकों की गुंडागर्दी जारी रही, तो जनता का आक्रोश सड़कों पर उतरने को मजबूर होगा।  प्रशासन से मांग करता है कि गोल-मोल जवाब देना बंद करें और पीड़ित परिवार को न्याय दिलाएं।

सवालों से भागना बंद कीजिए साहब, जनता सब देख रही है!