ग्रामीणों ने रोकी तो सरई थाना प्रभारी बोले—’कोई मुकदमा नहीं बनता, जाने दो’
सरई/सिंगरौली। क्षेत्र में बेखौफ जारी पशु तस्करी और पुलिस की संदेहास्पद भूमिका पर एक बार फिर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सरई थाना क्षेत्र अंतर्गत पशु तस्करी का मामला थमने का नाम नहीं ले रहा है। बीती रात संवाददाता द्वारा पशुओं से लदी एक गाड़ी को रोककर पुलिस को सूचना दी गई, जिसके बाद प्रशासनिक अमले का जो रवैया सामने आया, वह कानून व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाता है।
ग्रामीणों ने दिखाई सतर्कता, पुलिस ने दिखाई बेरुखी
मिली जानकारी के अनुसार, ग्रामीणों ने सतर्कता दिखाते हुए पशुओं से लदी एक संदेहास्पद गाड़ी को रोका और तत्काल इसकी जानकारी सरई थाना प्रभारी को दी। उम्मीद थी कि पुलिस मौके पर पहुंचकर कार्रवाई करेगी, लेकिन थाना प्रभारी ने उल्टे कहा— “इसमें कोई मुकदमा नहीं बनता, गाड़ी को जाने दो।” थाना प्रभारी के इस गैर-जिम्मेदाराना जवाब से क्षेत्र में पशु तस्करों को मिल रहे कथित संरक्षण को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।
ना कप्तान का सहारा, ना 112 की त्वरित सेवा
थाना प्रभारी से न्याय और कार्रवाई की उम्मीद टूटने के बाद जब ग्रामीणों ने जिले के पुलिस कप्तान को संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने जिले से बाहर होने की बात कही।इसके बाद आपातकालीन सेवा 112 पर कॉल कर घटना की जानकारी दी गई। तो उन्होंने 15 किलोमीटर दूर होने और 4 घंटे बाद आ पाने की बात कही। ‘त्वरित सहायता’ का दावा करने वाली 112 की टीम सूचना पाने पर 4 घंटे बाद मौके पर पहुंचेगी सुनकर कितना हास्पद लगता है। पुलिस की इस लचर कार्यप्रणाली से तस्करों के हौसले और बुलंद नजर आए।
कानून व्यवस्था पर उठते सवाल
मवेशियों की अवैध परिवहन पर थाना प्रभारी का यह बयान कि “मामला नहीं बनता”, क्या पुलिसिया सांठगांठ की ओर इशारा करता है?
आपातकालीन डायल 112 सेवा का 4 घंटे विलंब से पहुंचने का आस्वासन आम जनता की सुरक्षा के दावों की पोल खोलता है?
स्थानीय नागरिकों और ग्रामीणों का कहना है कि यदि क्षेत्र में खुलेआम पशु तस्करी हो रही है और पुलिस सूचना मिलने पर भी हाथ पर हाथ धरे बैठी है, तो उच्च अधिकारियों को इस पूरे मामले का कड़ा संज्ञान लेकर थाना प्रभारी और जिम्मेदार कर्मियों पर जांच कर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए।






