सिंगरौली की सड़कों पर मौत का तांडव खतरे की लाल बत्ती’ बनी मज़ाक: ट्रैफिक कंट्रोल रूम फेल, क्या कोई ‘बड़ा हादसा’ ही प्रशासन को जगाएगा?
संपादक विवेक कुमार पाण्डेय 6264145214
जिला सिंगरौली///देश की ‘ऊर्जाधानी’ सिंगरौली, अब अपनी बदहाल और बेलगाम ट्रैफिक व्यवस्था के कारण ‘खतरे की राजधानी’ में तब्दील हो चुकी है। शहर के चौक-चौराहों पर लगी ट्रैफिक लाइट (लाल बत्ती) महज एक शोपीस बनकर रह गई है, जिसका पालन न तो नागरिक कर रहे हैं और न ही इसे लागू कराने की ज़िम्मेदारी लेने वाले यातायात प्रभारी।
लाल सिग्नल: खुला निमंत्रण या ‘लाइसेंस टू किल’?
शहर के मुख्य चौराहों पर स्थिति भयावह है। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, ट्रैफिक सिग्नल लाल होने के बावजूद वाहन चालक धड़ल्ले से नियम तोड़ते हुए आगे बढ़ते हैं। यह खुली लापरवाही सिर्फ नियम का उल्लंघन नहीं है, बल्कि यह प्रत्यक्ष रूप से सड़क दुर्घटनाओं को न्यौता दे रही है। शहर के व्यस्तम मोड़ों पर दिनभर अफरा-तफरी का माहौल रहता है, जहां हर पल एक गंभीर टक्कर या बड़े हादसे की आशंका बनी रहती है।
प्रभारी की चुप्पी पर सवाल नहीं, सीधा आरोप!
स्थानीय नागरिकों का आक्रोश चरम पर है। उनकी आँखों के सामने यह बदहाली है, लेकिन यातायात प्रभारी और उनकी टीम इस ध्वस्त सिस्टम को दुरुस्त करने में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। नियमों के उल्लंघन पर ठोस कार्रवाई न होने से वाहन चालकों के हौसले बुलंद हैं।
VIP ड्यूटी, VVIP वसूली: पुलिसिंग पर ही बड़ा सवाल!
खबर का दूसरा और अधिक गंभीर पहलू ट्रैफिक थाने के आंतरिक प्रबंधन पर सवाल खड़ा करता है।
वर्दी में ‘वसूलीबाज’?: यातायात थाना के दो प्रधान आरक्षकों (चौबे और चौहान) का हमेशा ड्यूटी पर खाकी वर्दी में जमे रहना और मुंशी बागरी के माध्यम से मनमानी ड्यूटी लगवाना, विभाग की कार्यशैली पर संदेह पैदा करता है।
सौतेला व्यवहार: आरोप है कि मुंशी बागरी के साथ दो स्टाफ को छोड़कर, अन्य सभी कर्मचारियों के साथ सौतेला व्यवहार किया जाता है।
मनमानी का साम्राज्य: यह स्थिति साफ़ दर्शाती है कि यातायात विभाग में रोटेशन की नीति और अधिकारी का डर/भय लगभग समाप्त हो चुका है, जिसके कारण मनमानी और वसूली को बल मिल रहा है।
जनता की दो टूक मांग: अब निर्णायक कार्रवाई हो!
सिंगरौली में भारी वाहनों (डंपर, ट्रक) का बेलगाम प्रवेश पहले से ही समस्या को विकराल बना चुका है। ऐसे में लाल बत्ती का बेअसर होना छोटे वाहनों और आम जनता के लिए जानलेवा है।
सिंगरौली की जनता प्रशासन और पुलिस अधीक्षक से तत्काल हस्तक्षेप की मांग करती है:
ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों पर भारी जुर्माना लगाया जाए और सख्ती से नियम लागू हों।
यातायात थाने के अंदरूनी अनियमितताओं की निष्पक्ष जांच हो, और मनमानी ड्यूटी/वसूली में संलिप्त अधिकारियों पर कड़ी दंडात्मक कार्रवाई हो।
प्रशासन को यह समझना होगा कि एक छोटी सी चूक यहां किसी की जान ले सकती है। क्या प्रशासन किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रहा है, या फिर अब ‘लाल बत्ती’ को उसका असली मतलब वापस मिलेगा?





