सिंगरौली कलेक्टर पीछे कांग्रेस प्रदेश प्रवक्ता भास्कर मिश्रा के घर हमला कानून-व्यवस्था पर गंभीर सवाल
सिंगरौली जिले की कानून-व्यवस्था एक बार फिर कठघरे में है। कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता भास्कर मिश्रा के बैढ़न स्थित आवास पर दिनदहाड़े घुसकर की गई मारपीट की घटना ने पूरे जिले को झकझोर कर रख दिया है। खास बात यह है कि भास्कर मिश्रा का घर कलेक्टर कार्यालय के ठीक पीछे स्थित है, ऐसे में इस हमले ने प्रशासनिक सुरक्षा व्यवस्था पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।
भास्कर मिश्रा के अनुसार, घटना से कुछ घंटे पहले उन्हें फोन पर धमकी दी गई थी और शाम होते-होते कुछ असामाजिक तत्वों ने उनका गेट तोड़कर घर में घुसकर उनके साथ और उनके मित्र के साथ हाथापाई की। यह पूरी घटना उनकी पत्नी और छोटे बच्चों के सामने हुई, जिससे बच्चे अत्यंत भयभीत हो चुके हैं। भास्कर मिश्रा का कहना है कि अब उनके बच्चे सिंगरौली जिले में रहने से डर रहे हैं।
भास्कर मिश्रा ने आरोप लगाया है कि उन्होंने हाल ही में NCL निगाही CHP में मजदूरों के शोषण का मामला उठाया था, जिसमें मजदूरों को प्रतिमाह वेतन देकर उसी पैसे को वापस लेने का आरोप सामने आया था। इस प्रकरण में जिले के एक बड़े व्यापारी का नाम उजागर हुआ था। आरोप है कि इसी मामले को दबाने के लिए भास्कर मिश्रा को समझौते के तहत चुप रहने की नसीहत दी गई थी, जिसे उन्होंने सिरे से खारिज कर दिया। इसके बाद से उन्हें लगातार धमकियां दी जा रही थीं और अब यह हमला उसी साजिश का हिस्सा बताया जा रहा है।
भास्कर मिश्रा का यह भी आरोप है कि उक्त व्यक्ति के खिलाफ पुलिस के उच्च स्तर से कार्रवाई के निर्देश होने के बावजूद, जिले में उसके प्रभाव और रौब के कारण अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। मजदूरों द्वारा भी लगातार प्रताड़ना के आरोप सामने आते रहे हैं, लेकिन मामले दबे रहे।
इस पूरे घटनाक्रम के बाद 15 जनवरी 2026 को सूर्य भवन में एक शांति समिति बैठक आयोजित की गई, जिसे लेकर भी गंभीर सवाल उठ रहे हैं। आरोप है कि इस बैठक में एक हजार लोग शामिल हुए, जबकि अन्य समाजों की भागीदारी बेहद सीमित रही। कुछ पत्रकारों का यह भी आरोप है कि इस बैठक के दौरान CSP पन्नू सिंह परस्ते द्वारा कुछ पत्रकारों को बाहर कर दिया गया। चर्चा है एवं सूत्रों का दावा है कि इस शांति समिति बैठक के जरिए पूरे मामले को दबाने और भास्कर मिश्रा के समर्थकों को चुप कराने का प्रयास किया गया।
भास्कर मिश्रा, जो ब्राह्मण समाज से आते हैं, का आरोप है कि कुछ सामाजिक तत्वों द्वारा जातिगत दबाव की राजनीति की जा रही है और यह सब एक कथित माफिया के इशारे पर हो रहा है। आरोप यह भी है कि जिस व्यक्ति पर कई आपराधिक मामले दर्ज हैं, वही इस शांति समिति बैठक का प्रमुख आयोजक रहा, लेकिन आर्थिक ताकत और राजनीतिक संरक्षण के चलते उसके खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि
कलेक्टर कार्यालय के पीछे स्थित घर में घुसकर हमला करने वालों के हौसले इतने बुलंद कैसे हैं?
आखिर भास्कर मिश्रा को जान से मारने की धमकी कौन और क्यों दे रहा है?
हमले के ठीक अगले दिन मजदूरों के शोषण के आरोपी व्यक्ति के साथ शांति समिति बैठक करना कितना उचित है?
यह घटना न केवल एक जनप्रतिनिधि की सुरक्षा का सवाल है, बल्कि यह भी दर्शाती है कि यदि कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता सुरक्षित नहीं हैं, तो सिंगरौली का आम नागरिक कितना सुरक्षित है—यह सवाल आज हर व्यक्ति के मन में है।





