कठदहा पंचायत में करोड़ों का ‘कागजी’ खेल: नालियां, पुलिया और तालाब सिर्फ दस्तावेजों में बने; हक का पैसा मांगने पर मजदूरों को मिल रही जेल भेजने की धमकी।
जिला सिंगरौली///जनपद पंचायत देवसर के अंतर्गत आने वाली ग्राम पंचायत कठदहा में विकास कार्यों के नाम पर भारी वित्तीय अनियमितता और भ्रष्टाचार का एक बड़ा मामला उजागर हुआ है। पंचायत के मूल निवासी और सैकड़ों मजदूरों ने एकजुट होकर कलेक्ट्रेट कार्यालय सिंगरौली में एक लिखित शिकायत पत्र सौंपकर सरपंच और सचिव के खिलाफ सीधा मोर्चा खोल दिया है। ग्रामीणों का गंभीर आरोप है कि वर्ष 2011-12 से लेकर 2026 तक लगातार पद पर काबिज सरपंच दिलशरण सिंह द्वारा शासकीय योजनाओं के अंतर्गत विभिन्न निर्माण कार्यों में व्यापक स्तर पर फर्जीवाड़ा कर करोड़ों रुपये ठिकाने लगा दिए गए हैं।
18 से अधिक विकास कार्य सिर्फ फाइलों में दफन,
जमीनी हकीकत शून्य कलेक्टर को सौंपे गए शिकायती पत्र में ग्रामीणों ने कुल 18 बिंदुओं पर फर्जी तरीके से राशि आहरण करने का सनसनीखेज आरोप लगाया है। ग्रामीणों का कहना है कि जमीनी स्तर पर धेले भर का भी काम नहीं हुआ है, जबकि सरकारी खजाने से पूरी राशि निकाल ली गई।
कागजों पर दर्ज प्रमुख घोटालों की सूची:
नाली एवं पीसीसी निर्माण: यज्ञनारायण सिंह के घर से लोलर बैस के घर तक और हरी नारायण के घर से राजेन्द्र बैस के घर तक सिर्फ कागजों में नाली और सड़क बन गई।
पहुंच मार्ग: विश्वनाथ पनिका के घर से आंगनवाड़ी पहुंच मार्ग तक पीसीसी सड़क का अता-पता नहीं है।
शांति धाम निर्माण: कठदहा में जगशाला के किनारे व बरछिहवा नदी के किनारे शांति धाम का निर्माण कागजों में पूर्ण है।
पुलिया व पीसीसी:आदिवासी बस्ती में पुलिया निर्माण अधियरिया और अनुसूचित जनजाति बस्ती में पीसीसी निर्माण में भारी फर्जीवाड़ा।
अन्य कार्य: विभिन्न जगहों पर नाला बंधान, कूप निर्माण, वृक्षारोपण और तालाब निर्माण कार्यों की राशि भी डकार ली गई।
ग्रामीणों ने मांग की है कि वर्ष 2011 से 2026 तक हुए इन सभी कार्यों की निष्पक्ष जांच के लिए एक विशेष उच्चस्तरीय टीम गठित की जाए।
मजदूरों का शोषण: “दिन-रात पसीना बहाया, पर मजदूरी मांगने पर मिलती है धमकी”
भ्रष्टाचार के अलावा इस पंचायत में मजदूरों के अमानवीय शोषण का मामला भी गरमाया हुआ है। पीड़ित मजदूरों ने कलेक्ट्रेट में अलग से आवेदन सौंपकर अपनी व्यथा सुनाई। मजदूरों के अनुसार, सुधीन पनिका के घर के पास घधिया नदी में चल रहे चेक डैम निर्माण कार्य में उन्होंने दिन-रात कड़ी मेहनत की। लेकिन सरपंच और सचिव द्वारा उन्हें मजदूरी की राशि नहीं दी जा रही है।
जब भी गरीब मजदूर अपनी मेहनत की कमाई का पैसा मांगने जाते हैं, तो उनके साथ टाल-मटोल किया जाता है। मजदूरों ने आरोप लगाया कि सरपंच दिलशरण सिंह उन्हें खुलेआम धमकी देते हैं कि— “काम करना हो तो करो नहीं तो मत करो, मेरी शिकायत जहाँ करना है कर दो, मैं किसी से नहीं डरता हूँ।”
पीड़ित मजदूरों का दर्द: “हम गरीब लोग दिन-रात मेहनत करके थक चुके हैं। जब अपने हक का पैसा मांगते हैं तो हमें डराया-धमकाया जाता है। अब हमें सिर्फ कलेक्टर साहब से ही न्याय की उम्मीद बची है।”
14 जुलाई को कलेक्ट्रेट में प्रदर्शन, दर्ज हुई आधिकारिक शिकायत।
इस महाघोटाले और शोषण के खिलाफ मंगलवार (14 जुलाई 2026) को बड़ी संख्या में महिला और पुरुष ग्रामीण कलेक्ट्रेट पहुंचे। उन्होंने कलेक्टर कार्यालय की आवक शाखा में आधिकारिक तौर पर अपनी शिकायत दर्ज कराई है, जिस पर प्रशासन की सील लग चुकी है।
शिकायत दर्ज कराने वालों में मुख्य रूप से विश्वनाथ वैश्य, पृथ्वी सिंह, मुकेश सिंह, राममनोहर, जयप्रताप, दलप्रताप सिंह, दस मती सिंह, रामबती, लक्ष्मी, सुनीता सिंह सहित समस्त ग्रामवासी एवं पीड़ित मजदूर शामिल रहे। अब देखना यह है कि जिला प्रशासन इस गंभीर भ्रष्टाचार और मजदूरों के हक की इस लड़ाई पर क्या कड़ा एक्शन लेता है।
भ्रष्टाचार की जांच और सरपंच को हटाने की मांग।
बयान: “ग्राम पंचायत में हुए विकास कार्यों के नाम पर भारी भ्रष्टाचार किया गया है। हमारे पास भ्रष्ट कार्यों की पूरी सूची मौजूद है। हमारी प्रशासन से मांग है कि सूची के अनुसार सभी कार्यों की उच्च स्तरीय जांच कराई जाए। भ्रष्टाचार प्रमाणित होने पर सरपंच से पूरी राशि की रिकवरी की जाए और उन्हें तत्काल प्रभाव से पद से पृथक किया जाए।”
— शिवशंकर पनिका, ग्रामीण

मजदूरी डकारने और कार्रवाई की मांग।
बयान: “सरपंच ने हम गरीब मजदूरों से पंचायत के कामों में दिन-रात मजदूरी तो करा ली, लेकिन जब पैसे देने की बात आई तो साफ मुकर गए। हमारी महीनों की मजदूरी दबाकर रखी गई है। प्रशासन इस मामले में तत्काल संज्ञान ले। जो भी अधिकारी या जनप्रतिनिधि इसमें दोषी पाए जाएं, उन्हें तुरंत सस्पेंड किया जाए और उनसे रिकवरी कर हमारी मजदूरी दिलाई जाए ताकि भविष्य में कोई ऐसा करने की हिम्मत न करे।”
— राममनोहर यादव, पीड़ित मजदूर

घटिया निर्माण और शिकायत पर धमकी का आरोप
बयान: “हमारी पंचायत में साल 2011-12 से लेकर अब तक जितने भी निर्माण कार्य हुए हैं, सब बेहद घटिया और गुणवत्ताहीन हैं। भ्रष्टाचार की हद पार हो चुकी है। जब भी हम ग्रामीण इस घटिया निर्माण के खिलाफ आवाज उठाते हैं या शिकायत करने की बात करते हैं, तो सरपंच द्वारा सीधे तौर पर हमें गंभीर परिणाम भुगतने और देख लेने की धमकियां दी जाती हैं।”
— सोनकली सिंह , शिकायतकर्ता ग्रामीण महिला

मंत्री का रसूख और फर्जी केस में फंसाने की धमकी।
बयान: “सरपंच अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं। वे खुद को भाजपा नेता और अनुसूचित जनजाति का शहडोल संभाग प्रभारी बताते हैं। इतना ही नहीं, पंचायत एवं ग्रामीण विकास राज्य मंत्री राधा सिंह को अपनी ‘भाभी’ बताकर ग्रामीणों पर रौब झाड़ते हैं। विरोध करने पर फर्जी एफआईआर (FIR) कराकर जेल भिजवाने की धमकी देते हैं। रसूख के कारण कोई भी अधिकारी हमारी शिकायत सुनने को तैयार नहीं है।”
— विश्वनाथ बैश्य, स्थानीय निवासी






