सिंगरौली में ‘सफेदपोश’ कोयला कारोबार की काली परतें छाई मिक्सिंग से करोड़ों का खेल, सिस्टम पर गंभीर सवाल

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 सिंगरौली में ‘सफेदपोश’ कोयला कारोबार की काली परतें छाई मिक्सिंग से करोड़ों का खेल, सिस्टम पर गंभीर सवाल

 

 

जिला सिंगरौली।जिले में कोयला कारोबार से जुड़ा एक बड़ा नाम इन दिनों गंभीर आरोपों के घेरे में है। सूत्रों के अनुसार, यह कारोबारी वर्षों से जिले में प्रभावशाली छवि बनाए हुए है, लेकिन उसके कामकाज को लेकर कई लोग खुद को बर्बाद होता हुआ बताते हैं। आरोप है कि करोड़ों रुपये का काम करवाने के बाद भुगतान में जानबूझकर देरी की जाती है, जिससे कई छोटे कारोबारी धंधा छोड़ने को मजबूर हुए और कुछ मामलों में गंभीर स्वास्थ्य संकट तक सामने आए।

 

बताया जाता है कि यह कारोबारी सार्वजनिक रूप से बेहद शालीन और प्रभावशाली दिखाई देता है, महंगी गाड़ियों और शौक़ीन जीवनशैली के साथ सामाजिक पहचान बनाए हुए है, लेकिन सूत्रों का दावा है कि उसके कारोबार के पीछे अवैध गतिविधियों की लंबी श्रृंखला छिपी हुई है।

 

 कोयले में छाई मिक्सिंग का आरोप

 

सबसे गंभीर आरोप कोयले में छाई (Ash/Dust) की बड़े पैमाने पर मिक्सिंग से जुड़े हैं। सूत्रों के मुताबिक, हाल के समय में एक औद्योगिक इकाई के साथ कथित रूप से प्रतिदिन सैकड़ों टन छाई की आपूर्ति का सौदा हुआ है, जिसे कोयले में मिलाकर रेल मार्ग से पावर कंपनियों तक भेजा जा रहा है। यदि यह सही है, तो यह न केवल आर्थिक अपराध है बल्कि बिजली उत्पादन, गुणवत्ता और राष्ट्रीय संसाधनों से जुड़ा गंभीर मामला भी बनता है।

 

 पहले भी उठते रहे हैं सवाल

 

यह कोई पहला मौका नहीं है जब सिंगरौली में कोयले की गुणवत्ता और मिक्सिंग को लेकर सवाल उठे हों। बीते समय में भी इस तरह की शिकायतें सामने आती रही हैं, लेकिन हर बार जांच और कार्रवाई अधूरी ही नजर आई। स्थानीय स्तर पर यह चर्चा आम है कि प्रशासनिक और विभागीय स्तर पर मिलीभगत के बिना इतना बड़ा खेल संभव नहीं।

 

 पैसे से ‘मुंह बंद’ कराने के आरोप

 

सूत्रों का यह भी कहना है कि छोटे स्तर पर कथित तौर पर “सेटिंग” कर मामलों को दबा दिया जाता है। और यदि कोई अधिकारी या कर्मचारी दबाव में न आए, तो प्रभावशाली राजनीतिक संपर्कों का हवाला देकर रौब दिखाया जाता है।

इसके अलावा, कारोबारी परिवार की पृष्ठभूमि को लेकर भी आरोप हैं कि सूदखोरी जैसे व्यवसाय से वर्षों में भारी संपत्ति खड़ी की गई, जिसमें चेक बाउंस जैसे हथकंडों का इस्तेमाल किया गया।

 

बड़े सवाल

 

कोयले में छाई मिक्सिंग की नियमित निगरानी क्यों नहीं हो रही? रेल के जरिए पावर कंपनियों तक जा रहे कोयले की गुणवत्ता जांच कहां फेल हो रही है? यदि सब कुछ वैध है, तो स्वतंत्र एजेंसी से निष्पक्ष जांच से परहेज़ क्यों? क्या सचमुच “ऊपर से नीचे तक” कोई अदृश्य सुरक्षा कवच मौजूद है?

 

 जांच की मांग

 

यह पूरा मामला केवल एक कारोबारी का नहीं, बल्कि सिस्टम की साख से जुड़ा है। जरूरत है कि राज्य और केंद्र स्तर की स्वतंत्र एजेंसियां कोयले की सप्लाई चेन, गुणवत्ता परीक्षण और संबंधित सौदों की निष्पक्ष व पारदर्शी जांच करें, ताकि सच सामने आ सके और दोषी चाहे कितना भी प्रभावशाली क्यों न हो, जवाबदेह बने।

 

नोट: यह समाचार विभिन्न स्रोतों व स्थानीय चर्चाओं पर आधारित आरोपों को सामने रखता है। संबंधित पक्षों का पक्ष प्राप्त होने पर उसे भी समान रूप से प्रकाशित किया जाएगा।