कांग्रेस के फायरब्रांड नेता भास्कर मिश्रा फंसे  प्रशासन पर पक्षपात के गंभीर आरोप

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कांग्रेस के फायरब्रांड नेता भास्कर मिश्रा फंसे  प्रशासन पर पक्षपात के गंभीर आरोप

 

 

जिले की राजनीति में भूकंप लाने वाला भास्कर मिश्रा प्रकरण अब तूल पकड़ता जा रहा है। कांग्रेस के तेजतर्रार नेता पर कथित फर्जी एट्रोसिटी एक्ट का मामला दर्ज कर जेल भेजने के बाद, पूरा विपक्ष सड़कों पर उतर आया है।कथित फर्जी एट्रोसिटी एक्ट के मामले ने जिले की राजनीति को गरमा दिया है। पूर्व विधायक मउगंज लक्ष्मण तिवारी के नेतृत्व में विप्र समाज और कांग्रेसजनों ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय का घेराव कर ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी है कि यदि तीन दिन के भीतर भास्कर मिश्रा को जमानत नहीं मिलती, तो पूरे संभाग में व्यापकआंदोलन खड़ा किया जाएगा।

 

विगत शुक्रवार को म‌उगंज के पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी की अगुवाई में सैकड़ों विप्र समाजजन और कांग्रेसी कार्यकर्ता पुलिस अधीक्षक कार्यालय के बाहर उमड़े और नगर पुलिस अधीक्षक पन्नू सिंह परस्ते को ज्ञापन थमाते हुए चेतावनी दी – “तीन दिन में जमानत दो, वरना पूरा संभाग जाम करेंगे।”

इस दौरान एसडीओपी पन्नू सिंह परस्ते ने कहा—“नोटिस की तामील विधायक राजेंद्र मेश्राम को नहीं हो पा रही है, वे बाहर बताए जा रहे हैं। जब तक नोटिस तामील नहीं होगी, भास्कर मिश्रा को जमानत नहीं मिल सकती। लेकिन सवाल उठना स्वाभाविक है कि — क्या प्रशासन जानबूझकर नोटिस की आड़ में जमानत रोक रहा है? इसे देख जन चर्चाएं तेज हैं कि यह मामला महज कानूनी नहीं, बल्कि सत्ता और विपक्ष की सियासी जंग है। क्यों कि एट्रोसिटी एक्ट जैसे गंभीर कानून का इस्तेमाल यदि राजनीतिक बदले की भावना से किया जा रहा है, तो यह लोकतंत्र के लिए खतरनाक मिसाल है। प्रकरण में जमानत प्रक्रिया में देरी न केवल प्रशासन की अक्षमता बल्कि सत्ता पक्ष के इशारे पर काम करने की बू देती है।यह स्थिति प्रशासन की निष्पक्षता पर प्रश्नचिह्न खड़ा करती है। यदि नोटिस तामील जैसी बुनियादी प्रक्रिया भी पुलिस विभाग समय पर पूरी नहीं कर पा रहा है, तो यह केवल प्रशासनिक अक्षमता ही नहीं बल्कि जानबूझकर खींचतान की रणनीति भी प्रतीत होती है। न्यायालयीन प्रक्रिया में बाधा डालना और जमानत को रोकना लोकतांत्रिक मूल्यों और विधि-व्यवस्था के साथ खिलवाड़ है।

बड़े आंदोलन की आहट -आसन्न!

पूर्व विधायक लक्ष्मण तिवारी ने साफ शब्दों में चेताया है कि

यदि तीन दिन में भास्कर मिश्रा को जमानत नहीं मिली, तो हम लोग रीवा संभाग के हर जिले में सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करेंगे। जिसकी जिम्मेदारी शासन -प्रशासन की होगी।

आज के घटनाक्रम को देख प्रतीत होता है कि -यह पूरा मामला अब “कानून बनाम सत्ता की ताकत” का रूप ले चुका है। आने वाले दिनों में सिंगरौली ही नहीं, बल्कि पूरे संभाग की सियासत में भयंकर भूचाल आ सकता है।यह मामला महज व्यक्तिगत नहीं बल्कि राजनीतिक प्रतिशोध का परिणाम बनता जा रहा है। जन चर्चाओं के अनुसार एट्रोसिटी एक्ट जैसे गंभीर कानून का दुरुपयोग कर विपक्षी नेताओं को दबाने की कोशिश लोकतांत्रिक व्यवस्था पर धब्बा है। यदि प्रशासन त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई नहीं करता तो यह प्रकरण कानून के राज की बजाय सत्ता के राज का उदाहरण बनकर सामने आएगा। इस दौरान कांग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता विनोद शर्मा, पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सीधी बृजेश तिवारी, जिला महामंत्री सीधी संदीप परोहा, धीरेन्द्र मिश्रा प्रदेश युवा महासचिव रीवा संभाग से शिरकत करने पहुंचे जहां प्रमुख रूप से अंजनी दुबे एडवोकेट, ज्ञानेंद्र द्विवेदी पूर्व जिलाध्यक्ष,श्रीमती शशिकला पाण्डेय,श्रीमती मधु शर्मा,रामअशोक शर्मा पूर्व जिलाध्यक्ष ,देवेन्द्र कुमार पाठक (दरोगा), रमाशंकर शुक्ला ,अमित द्विवेदी,मनोज दुबे,सीपी शुक्ला,सूर्या द्विवेदी,पंकज पांडे,उपेन्द्र शुक्ला,दिलीपधर द्विवेदी,उमाशंकर पाण्डेय , रामसचे दुबे ,रामनिवास तिवारी ,राजेंद्र दुबे,बिपिन तिवारी ,विनय कुमार शुक्ला ,निखिल तिवारी,प्रभंसु दुबे विनोद कुमार शुक्ला उपेन्द्र कुमार दुबे, श्रवण दुबे,अतुल पाण्डेय ,नीरेंद्र कुमार दुबे ,प्राशून पाण्डेय दुर्गा पाण्डेय निवेश कुमार पांडेय, अनूप द्विवेदी ,मीनाक्षी दुबे पंकज पाण्डेय आलोक शुक्ला, शैलेन्द्र पाण्डेय ,आशीष पाण्डेय अरुण पाण्डेय ,वरुण कुमार द्विवेदी ,मनीष चौबे श्री राम दुबे, अम्ब्रेश तिवारी,जटाशंकर पाठक,अखिलेश कुमार पाण्डेय, प्रदीप पाण्डेय अंकित शुक्ला धर्मेन्द्र उपाध्याय असुइया प्रसाद शुक्ला ब्रिजवासी मिश्रा ब्रिजेश कुमार उपाध्याय,

राजेश शर्मा ,शिवेंद्र तिवारी ,देवेश द्विवेदी अतुता नन्द उपाध्याय.अनुप चतुर्वेदी शिवेंद्र नाथ शुक्ला ,अविनाश पाण्डेय, विजय देव पाण्डेय, सूरज पाण्डेय, मिथिलेश तिवारी ,सुरेश कुमार मिश्रा ,मुद्रिका प्रसाद चतुर्वेदी ,मोनू दुबे ,हनुमान तिवारी ,लल्लूराम मिश्रा ,सुरेश कुमार दुबे ,दया निधि दुबे, संजय पाठक ,रामचंद्र त्रिपाठी,उमेश कुमार मिश्रा, हीरामन शुक्ला, निलेश कुमार पाण्डेय ,राहुल पाण्डेय ,धीरेन्द्र पाण्डेय ,आलोक पाठक ,उपेन्द्र द्विवेदी ,योगेश पाण्डेय,श्याम कार्तिक दुबे ,राजकुमार दुबे उमेश तिवारी,वेदांती पाण्डेय ,रमेश कुमार शुक्ला, निर्मलेंद्र पाण्डेय,राकेश कुमार दुबे आदि मौजूद रहे।

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