सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ने से एक महिला की मौत

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सुरक्षा मानकों की धज्जियां उड़ने से एक महिला की मौत

 

सिंगरौली  औद्योगिक सुरक्षा और प्रबंधन की संवेदनहीनता ने आज एक और जान ले ली। सिंगरौली स्थित बधौरा अडानी पावर प्लांट (खैराही) के ऐश डैम के पास कंपनी की एक भारी मशीन की चपेट में आने से एक महिला की मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई। इस घटना के बाद से पूरे क्षेत्र में हड़कंप मचा हुआ है और स्थानीय लोगों में भारी आक्रोश है।

 

लापरवाही या ‘संस्थागत हत्या’?

 

यह हादसा मात्र एक दुर्घटना नहीं, बल्कि सुरक्षा ऑडिट और जमीनी निरीक्षण के अभाव का प्रत्यक्ष परिणाम है। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि प्लांट परिसर और उसके आसपास सुरक्षा के दावों की पोल खुल चुकी है। नदारद सुरक्षा घेरा: भारी मशीनों के संचालन के दौरान जिस सुरक्षा प्रोटोकॉल का पालन होना चाहिए, वह पूरी तरह गायब दिखा।प्रशासनिक मौन: लेबर इंस्पेक्टर और सुरक्षा ऑडिट विभागों की निष्क्रियता ने कंपनियों को इतना बेलगाम कर दिया है कि वे इंसान की जान को महज एक ‘आंकड़ा’ समझने लगी हैं।

 

जवाबदेही से बचता प्रबंधन

 

हैरानी की बात यह है कि इतनी बड़ी घटना के बावजूद कंपनी प्रबंधन की ओर से अब तक कोई ठोस स्पष्टीकरण या जिम्मेदारी स्वीकार नहीं की गई है। स्थानीय नागरिकों की मांग है कि इसे सिर्फ एक हादसा न मानकर गैर-इरादतन हत्या (Culpable Homicide) का मामला माना जाए और प्रबंधन के जिम्मेदार अधिकारियों पर तत्काल एफआईआर दर्ज की जाए। “क्या प्रशासन किसी बड़ी सीख का इंतजार कर रहा है? जब तक कंपनियों पर कठोर दंडात्मक कार्रवाई नहीं होगी, तब तक मज़दूरों और आम नागरिकों की जान इसी तरह दांव पर लगी रहेगी।” मुख्य सवाल जो जवाब मांगते हैं: प्रश्न स्थिति सुरक्षा ऑडिट क्या हाल के महीनों में कोई वास्तविक निरीक्षण हुआ?  मशीन ऑपरेटर क्या भारी मशीन चलाने वाला कर्मचारी प्रशिक्षित और सतर्क था? लेबर कानून  क्या लेबर इंस्पेक्टर ने कभी कार्यस्थल की सुरक्षा स्थितियों की जांच की? सिंगरौली के इस पावर हब में विकास की चमक के पीछे सुरक्षा की जो काली हकीकत छिपी है, वह अब उजागर हो चुकी है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर सख्ती दिखाता है या हमेशा की तरह मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है।