सिंगरौली में CSR से विकास की नई इबारत लिख गए कलेक्टर गौरव बैनल

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10-11 महीनों में शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, आजीविका और पर्यटन से जुड़ी 10 बड़ी पहलों के लिए जुटाई गई राशि

 

 ₹14 करोड़ का स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और ₹12 करोड़ का ऑडिटोरियम बने विकास की खास पहल

 

सिटी टू विलेज समाचार पत्र सिंगरौली। कोयला खदानों और बिजली उत्पादन के लिए देशभर में पहचान रखने वाले सिंगरौली जिले में विकास की अवधारणा को व्यापक बनाने की दिशा में कलेक्टर गौरव बैनल के कार्यकाल में कई महत्वपूर्ण पहल सामने आई हैं। कॉरपोरेट सोशल रिस्पॉन्सिबिलिटी (CSR) के माध्यम से स्थानीय संसाधनों और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण पर जोर देते हुए शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल, कृषि, महिला सशक्तीकरण, विज्ञान और पर्यटन से जुड़ी 10 प्रमुख पहलों के लिए महज 10-11 महीनों में राशि जुटाने की जानकारी सामने आई है। इनमें कुछ परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जबकि कुछ निर्माण और क्रियान्वयन के अलग-अलग चरणों में हैं। जिलेवासियों के बीच कलेक्टर के कार्यकाल को लेकर सकारात्मक प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। लोगों का कहना है कि यदि उन्हें कुछ समय और जिले में काम करने का अवसर मिलता, तो विकास की इन पहलों को और आगे बढ़ाया जा सकता था। हालांकि, इन योजनाओं की वास्तविक उपलब्धियों का आकलन उनके पूर्ण होने और आम लोगों को मिलने वाले लाभ के आधार पर किया जाएगा। तात्कालिक उपायों के बजाय स्थायी परिसंपत्तियों पर जोर

इन पहलों की खास बात यह है कि शुरुआत में केवल तात्कालिक समाधान तलाशने के बजाय जिले की बुनियादी कमियों की पहचान और दीर्घकालिक व्यवस्था विकसित करने पर ध्यान केंद्रित किया गया। सहयोगी कंपनियों के CSR सहयोग से ऐसी परिसंपत्तियां विकसित करने की योजना बनाई गई, जिनका लाभ आने वाले वर्षों तक विद्यार्थियों, किसानों, महिलाओं और आम नागरिकों को मिल सके।

खेल सुविधाओं के विस्तार के लिए लगभग ₹14 करोड़ की लागत से स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स की पहल की गई है। इसमें सरकारी स्कूलों और छात्रावासों के बच्चों के लिए टेनिस, बैडमिंटन, बास्केटबॉल, स्विमिंग सहित विभिन्न खेलों की सुविधाएं विकसित करने तथा नियमित प्रशिक्षण के लिए अकादमी और व्यवस्थित व्यवस्था तैयार करने का लक्ष्य है। इसके अतिरिक्त कन्या शिक्षा परिसर और मेडिकल कॉलेज में भी खेल संबंधी सुविधाओं के विकास की पहल की गई है। इसी क्रम में जिले के प्रमुख कॉलेज में लगभग ₹12 करोड़ की लागत से 400 सीटों वाला अत्याधुनिक ऑडिटोरियम विकसित करने की योजना शामिल है। इससे शैक्षणिक कार्यक्रमों, सांस्कृतिक आयोजनों, संगोष्ठियों और सार्वजनिक गतिविधियों के लिए बेहतर आधारभूत ढांचा उपलब्ध हो सकेगा।

 

सरकारी विद्यार्थियों को प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी

शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी

 

स्कूलों के 200 विद्यार्थियों को JEE और NEET जैसी प्रतियोगी परीक्षाओं की पेशेवर कोचिंग उपलब्ध कराने की पहल महत्वपूर्ण मानी जा रही है। इसका उद्देश्य आर्थिक संसाधनों की कमी के कारण गुणवत्तापूर्ण कोचिंग से वंचित रहने वाले विद्यार्थियों को प्रतिस्पर्धी अवसर उपलब्ध कराना है। वहीं, ‘सिंगरौली के सितारे’ कार्यक्रम के माध्यम से सरकारी स्कूलों में टेलीस्कोप उपलब्ध कराने और IISER के सहयोग से वर्षभर वैज्ञानिक गतिविधियां संचालित करने की योजना बनाई गई है। इससे विद्यार्थियों में विज्ञान के प्रति रुचि, तार्किक सोच और खोज की प्रवृत्ति विकसित करने का लक्ष्य है।

 

किसानों और महिलाओं के लिए आजीविका के नए अवसर

 

स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती देने के लिए मछली के बीज की आधुनिक हैचरी विकसित करने की पहल भी इन योजनाओं में शामिल है। इसका उद्देश्य जिले के विभिन्न जलाशयों में मत्स्य पालन को प्रोत्साहित करना और इससे जुड़े लोगों की आजीविका को मजबूत करना है।

कृषि क्षेत्र में तापमान नियंत्रित पॉलीहाउस के माध्यम से लगभग 15 से 20 किसानों को तकनीक आधारित खेती से जोड़ने की योजना है। इसके जरिए अधिक मूल्य वाली सब्जियों और फूलों का उत्पादन बढ़ाने तथा किसानों की आय के नए रास्ते खोलने का प्रयास किया जाएगा।

महिलाओं के आर्थिक सशक्तीकरण के लिए सिलाई, पोल्ट्री और बकरी पालन से जुड़ी ट्रेनिंग, प्रमाणन तथा उत्पादन संबंधी संसाधन उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है। इसका उद्देश्य महिलाओं को केवल ऋण से जोड़ना नहीं, बल्कि उन्हें अपना काम शुरू करने और लंबे समय तक संचालित करने के लिए जरूरी पूंजीगत संसाधन उपलब्ध कराना है।

 

स्वास्थ्य से पर्यटन तक विकास का विस्तार

 

स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के लिए जिला अस्पताल के ब्लड बैंक की व्यवस्था को सुदृढ़ करने की पहल की गई है, ताकि जरूरतमंद मरीजों को समय पर रक्त उपलब्ध कराने में मदद मिल सके। वहीं, जलाशयों के विकास को आजीविका और पर्यटन से जोड़ने के लिए इंटीग्रेटेड लेक डेवलपमेंट की अवधारणा सामने रखी गई है। इसमें केज फिश कल्चर, बोटिंग और पर्यटन संबंधी गतिविधियों के माध्यम से स्थानीय स्तर पर रोजगार और आय के अवसर विकसित करने का लक्ष्य है।

 

औद्योगिक जिले में स्थानीय पूंजी निर्माण की पहल

 

सिंगरौली जैसे औद्योगिक जिले में CSR के माध्यम से स्थानीय विकास के लिए संसाधन जुटाने की यह पहल इसलिए भी महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसका लक्ष्य केवल आर्थिक गतिविधियों का विस्तार नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, कौशल, खेल और आजीविका से जुड़ी दीर्घकालिक परिसंपत्तियों का निर्माण करना है। कलेक्टर गौरव बैनल के कार्यकाल में सामने आई इन 10 पहलों को लेकर जिलेवासियों की उम्मीदें जुड़ी हैं। अब इन योजनाओं की निरंतरता, समयबद्ध पूर्णता और आम लोगों तक इनके लाभ पहुंचने पर इनकी सफलता निर्भर करेगी। यदि योजनाएं निर्धारित उद्देश्यों के अनुरूप संचालित होती हैं, तो सिंगरौली की औद्योगिक पहचान के साथ शिक्षा, स्वास्थ्य, खेल और स्थानीय आजीविका के क्षेत्र में भी नई पहचान विकसित हो सकती है।