सोनभद्र में नियमों की धज्जियां: श्री महादेव एंटरप्राइजेज की खदानों पर घिरे कई विभाग एनओसी और ब्लास्टिंग मैनेजमेंट पर उठे गंभीर सवाल
ओबरा/सोनभद्र ।जिले के ओबरा क्षेत्र में खनन गतिविधियों को लेकर एक बार फिर प्रशासनिक लापरवाही और खनन माफियाओं की मनमानी खुलकर सामने आ गई है। श्री महादेव एंटरप्राइजेज द्वारा संचालित खदानों में पर्यावरण, सुरक्षा और प्रशासनिक मानकों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। स्थिति यह है कि अब केंद्रीय भूजल प्राधिकरण, राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, ब्लास्टिंग मैनेजमेंट और वन्यजीव विभाग द्वारा जारी की गई अनापत्ति प्रमाण पत्रों (NOC) की सत्यता और अनुपालन पर भी बड़े सवाल खड़े होने लगे हैं।
1. पर्यावरण और भूजल नियमों की अनदेखी

नियमों के अनुसार खदान संचालन के लिए केंद्रीय भूजल प्राधिकरण और पर्यावरण नियंत्रण बोर्ड से कड़ी शर्तों के तहत एनओसी ली जाती है। आरोप है कि श्री महादेव एंटरप्राइजेज द्वारा इन तमाम शर्तों को ताक पर रख दिया गया है:
जल स्रोतों का दोहन: निर्धारित मानकों से अधिक भूजल का उपयोग और अनियंत्रित दोहन किया जा रहा है, जिससे आसपास के इलाकों में जल स्तर पर संकट मंडराने लगा है।
प्रदूषण का प्रकोप: खदान से उड़ने वाले धूल के गुबार और अनियंत्रित मलबे ने ओबरा की आबोहवा को जहरीला बना दिया है, जिससे स्थानीय निवासियों और किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
2. ब्लास्टिंग मैनेजमेंट और सुरक्षा के मोर्चे पर लापरवाही

खदानों में पत्थरों को तोड़ने के लिए अपनाए जाने वाले ब्लास्टिंग मैनेजमेंट के नियमों को पूरी तरह दरकिनार किया जा रहा है:
बिना किसी वैज्ञानिक आकलन और तय समय-सीमा के भारी मात्रा में विस्फोटक का इस्तेमाल किया जा रहा है।
बेकाबू ब्लास्टिंग के कारण आसपास के रिहायशी इलाकों में तीव्र कंपन महसूस होता है, जिससे मकानों में दरारें आने की शिकायतें आम हो चुकी हैं और ग्रामीणों की जान पर हर वक्त खतरा बना रहता है।
3. वन्यजीव विभाग के प्रावधानों पर भी सवाल

ओबरा और सोनभद्र का यह क्षेत्र समृद्ध जैव विविधता और वन्यजीव गलियारों के करीब स्थित है। ऐसे में, वन्यजीव विभाग की एनओसी मिलने के बावजूद भारी मशीनरी की आवाजाही, जंगलों की कटाई और रात के वक्त होने वाली गतिविधियों ने स्थानीय पारिस्थितिकी तंत्र (Ecosystem) को गंभीर क्षति पहुंचाई है।
प्रशासनिक उदासीनता और उठती मांगें
जिम्मेदार विभागों की नाक के नीचे चल रहे इस अवैध खेल ने विभागीय कार्यप्रणाली को कटघरे में खड़ा कर दिया है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या एनओसी सिर्फ कागजों तक सीमित रह गई है और धरातल पर नियमों के पालन की मॉनिटरिंग क्यों नहीं की जा रही?
क्षेत्र के जागरूक नागरिकों और पर्यावरण प्रेमियों ने जिला प्रशासन से मांग की है कि उच्च स्तरीय टीम गठित कर श्री महादेव एंटरप्राइजेज की खदानों की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी पाए जाने पर तत्काल प्रभाव से कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।






