पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को मिलती है शांति 

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पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को मिलती है शांति 

 

जिला सोनभद्र /// सोनभद्र जिले के स्थानीय थाना क्षेत्र के छठ घाट के सतत वाहिनी नदी के तट पर हर वर्ष काली मंदिर के पुजारी राजीव रंजन तिवारी तथा आनन्द द्विवेदी के द्वारा अपने अपने जजमानों से अपने पितरों का तर्पण तिलांजलि का कार्यक्रम कराया जाता है यह तिलांजलि तिथि हर जजमान का अलग-अलग तिथि होता है उसी हिसाब से उन्हें अपने पूर्वजों का तर्पण कराया जाता है या तर्पण का कार्यक्रम अश्विन मास (कुंवार ) माह के कृष्ण पक्ष के प्रथम दिन से पितृपक्ष प्रारंभ हो जाता है दूसरे दिन से जजमानों से तर्पण तिलांजलि देते हुए अपने पितरों और पूर्वजों को याद किया जाता है । राजीव रंजन तिवारी ने बताया कि इस दौरान पूरी शुद्धता के साथ लोग पूर्वजों को याद करते हैं और उनके लिए विभिन्न तरह के अनुष्ठान करते हैं। पितृ पक्ष में श्राद्ध, तर्पण और पिंडदान करने से पूर्वजों की आत्मा को शांति मिलती है और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है। इस साल पितृ पक्ष 2025 की शुरुआत 7 सितंबर से हो चुकी है। वहीं, इसका समापन 21 सितंबर को होगा।

 

जाने विधि_ विधान नियम_ पितृ पक्ष अश्विन मास के कृष्ण पक्ष में होता है, जो भाद्रपद पूर्णिमा के बाद शुरू होता है और आश्विन कृष्ण अमावस्या को समाप्त होता है, यानी पितरों के लिए यह चंद्र कैलेंडर का वह समय होता है जब चंद्रमा का आकार घटता जाता है.

विस्तृत जानकारी शुरुआत: पितृ पक्ष भाद्रपद माह की पूर्णिमा तिथि से शुरू होता है और कृष्ण पक्ष के अंतर्गत आता है.

अवधि: यह भाद्रपद पूर्णिमा से शुरू होकर आश्विन मास की कृष्ण पक्ष की अमावस्या तक चलता है।

 

महत्व इस अवधि को पितरों को समर्पित किया जाता है, और इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए श्राद्ध और तर्पण जैसे अनुष्ठान किए जाते हैं.

चंद्रमा की स्थिति:

यह चंद्रमा के घटते हुए हिस्से (कृष्ण पक्ष) में पड़ता है, जिसमें पूर्णिमा के बाद चंद्रमा का आकार धीरे-धीरे कम होता जाता है! ऐसा माना जाता है कि इन दिनों में पितृ धरती पर आते हैं और अपने परिवार को आशीर्वाद देते हैं।