रंग ला रही बंधा कोल प्रोजेक्ट क्षेत्र में हिंडाल्को – एसेल माइनिंग की पहल परती ज़मीन पर खेती कर खिले किसानों के चेहरे

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रंग ला रही बंधा कोल प्रोजेक्ट क्षेत्र में हिंडाल्को – एसेल माइनिंग की पहल परती ज़मीन पर खेती कर खिले किसानों के चेहरे

सिंगरौली के चार गांवों में 13 किसान परिवारों को मिला लाभ अब ज़मीन पर हो रही बहुफसलीय खेती किसानों ने राजस्थान जाकर सीखा बागवानी के गुर

“हम बंधा कोल परियोजना क्षेत्र के समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। किसानों को उन्नत खेती के विषय में अवगत कराने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हम कार्यरत हैं। अभी हम सिंघरौली के पचौर, देवरी, चितरवईकला और लामीदह में 13 किसान परिवारों को बागवानी कराने में सहायता दे रहे हैं। हम कोल परियोजना के गांवों के साथ आस-पास के समुदाय के सतत विकास के लिए प्रयत्नशील हैं”- कैलाश पांडेय- बिजनेस हेड, माइंस एंड मिलिरल, हिंडाल्को

“हम कोल परियोजना क्षेत्र में विगत 4 वर्षों से अधिक समय से सीएसआर के विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। किसानों को खेती के लिए तकनीकी रूप से भी परामर्श दी जा सके इसके लिए अभी हमने 13 किसानों को राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में भ्रमण कराकर उन्हें बगान विकसित करने की नई तकनीक और उत्पादन के बारे में जानकारी दी है।“- थॉमस चैरियन एमडी, एसेल माइनिंग

वैढन (सिंघरौली)। सिंघरौली जिले के पचौर गांव के महुअरिया टोला निवासी हरि प्रसाद द्विवेदी आजकल अपनी परती जमीन पर लहलहाती रामतिल की फसल की कटाई के बाद अब उसी जमीन पर उड़द और मूंग बोने की तैयारी कर रहे हैं। उनका कहना है कि अभी मैंने तीन क्विंटल रामतिल को 80 रूपए किलो की दर से बेचा है और लाभ कमाया है। पहले चूंकि जमीन परती थी और चारों ओर से खुली थी लिहाजा मवेशियों के कारण खेती हो ही नहीं पाती थी। ऐसल -हिंडाल्को कंपनी द्वारा की गई सहायता से हमे बहुत लाभ हुआ है। और हम एक नहीं बल्कि बहुफसलीय खेती करने को तैयार हैं।

लेकिन यह स्थिति अचानक नहीं बदली। बंधा कोल परियोजना क्षेत्र और उसके आस-पास के गांवों में हिंडाल्को-एसेल माइंनिंग कंपनी द्वारा किसानों को उनकी परती पड़ी जमीन पर खेती करने के लिए सीएसआर के तहत निरंतर सहायता देने से हालात बदले हैं। कंपनी द्वारा सिंघरौली के पचौर, देवरी, चितरवईकला और लामीदह में 13 किसान परिवारों के कुल 17.5 एकड़ जमीन पर बागवानी कराने के लिए सहायदा प्रदान की जा रही है। दरअसल, पहले इनकी जमीन चारों ओर से खुली थी, जिस वजह से मवेशी इनके फसलों को बर्बाद कर दे रहे थे। लिहाजा किसी भी फसल का होना मुश्किल हो गया था। इस बात की जानकारी जब कंपनी को मिली तो उनके द्वारा किसानों से संपर्क कर उनकी सहमती से उनके जमीन पर कुल 13 किसान परिवारों के 17.5 एकड़ ज़मीन पर कुल 1111 पोल लगाकर उनपर कंटील तारों की 6 परत घेराव किया गया। सिंचाई की व्यवस्था पहले से ही थी, और कंपनी ने विभिन्न प्रकार को फलों जैसे आम, अमरूद, नींबू और कश्मीरी बेर के पौधे उपल्बध कराए गए। साथ ही पौधों के संरक्षण के लिए खाद व कीटनाशक भी उपलब्ध कराए गए। इसके लिए कंपनी द्वारा कृषि विज्ञान केंद्र सिंघरौली के वैज्ञानिकों द्वारा किसानों को बागवानी के विभीन्न आयामों पर प्रशिक्षण भी दिलाया गया। इन सभी चार गावों में 13 किसानों की जमीन पर यह पौधे अब अच्छी तरह बढ़ रहे हैं। साथ ही जमीन पर बहुफसलीय अंतरवर्तीय फसलें जैसे रामतिल, चना, गेहूं व सब्जियां भी लगाई जा रही हैं और किसान इसका लाभ ले रहे हैं।

इस परियोजना के बारे में जानकारी देते हुए हिंडाल्को के बिजनेस हेड, माइंस एंड मिलिरल, कैलाश पांडेय ने बताया कि “हम बंधा कोल परियोजना क्षेत्र के समुदाय के सर्वांगीण विकास के लिए निरंतर काम कर रहे हैं। किसानों को उन्नत खेती के विषय में अवगत कराने और उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में हम कार्यरत हैं। हम कोल परियोजना के गांवों के साथ आस-पास के समुदाय के सतत विकास के लिए प्रयत्नशील हैं।“

यही नहीं, इन किसानों को भविष्य के लिए उन्नत खेती के गुर सिखाने के उद्देश्य से कंपनी द्वारा राजस्थान के संवाईमाधोपुर के कुल चार गांवों का भ्रमण 19 से 22 जनवरी 2026 तक कराया गया जहां किसानों ने फसल और उत्पादन की नई तकनीक, लागत और आय के बारे में विस्तार से जाना। एसेल माइनिंग के एमडी थॉमस चैरियन ने कहा कि “हम कोल परियोजना क्षेत्र में विगत 4 वर्षों से अधिक समय से सीएसआर के विभिन्न जन कल्याणकारी योजनाओं पर कार्य कर रहे हैं। किसानों को खेती के लिए तकनीकी रूप से भी परामर्श दी जा सके इसके लिए अभी हमने 13 किसानों को राजस्थान के सवाईमाधोपुर जिले में भ्रमण कराकर उन्हें बगान विकसित करने की नई तकनीक और उत्पादन के बारे में जानकारी दी है ।