न्यू सतनाम ट्रांसपोर्ट, जीटीसी और एसीसी की गाड़ियों पर नियमों की अनदेखी के आरोप, ट्रांसपोर्टर मनोज यादव की दबंगई पर उठे सवाल

126

प्रशासन के आदेश बेअसर! न्यू सतनाम ट्रांसपोर्ट, जीटीसी और एसीसी की गाड़ियों पर नियमों की अनदेखी के आरोप, ट्रांसपोर्टर मनोज यादव की दबंगई पर उठे सवाल

 

 

गजरा बहरा से सरई तक बिना काफिले दौड़ रहे ओवरलोड कोल वाहन, ट्रांसपोर्टरों की मनमानी से जनता त्रस्त

 

 

 

खनुआ हायर सेकेंड्री स्कूल के पास कोल वाहनों की पार्किंग से स्कूली बच्चों की जान जोखिम में, ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई की मांग की

 

सिटी टू विलेज सिंगरौली । जिले में कोयला परिवहन को लेकर जिला प्रशासन द्वारा समय-समय पर जारी किए गए निर्देश और सुरक्षा व्यवस्था के दावे धरातल पर दम तोड़ते नजर आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि गजरा बहरा से सरई तक न्यू सतनाम ट्रांसपोर्ट, जीटीसी एवं एसीसी से जुड़े कोयला परिवहन वाहनों का संचालन बिना काफिले (कनवॉय) के खुलेआम किया जा रहा है। इतना ही नहीं, इन वाहनों के ओवरलोड होने और तेज रफ्तार से दौड़ने के भी आरोप लगाए जा रहे हैं। ग्रामीणों का कहना है कि नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ाई जा रही हैं, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंखें मूंदे बैठा है।

स्थानीय नागरिकों का आरोप है कि ट्रांसपोर्टर मनोज यादव प्रशासन के निर्देशों को चुनौती देते हुए अपनी दबंगई के बल पर कोल वाहनों का संचालन करा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि जिला प्रशासन ने कोल परिवहन के लिए स्पष्ट नियम तय किए हैं तो आखिर उनका पालन क्यों नहीं कराया जा रहा। सवाल यह भी उठ रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में यह पूरा खेल चल रहा है।

ग्रामीणों का कहना है कि सबसे गंभीर स्थिति खनुआ हायर सेकेंड्री स्कूल के पास बनी हुई है। आरोप है कि यहां कोयला परिवहन में लगे भारी वाहनों की पार्किंग बना दी गई है। सुबह और दोपहर के समय जब सैकड़ों छात्र-छात्राएं स्कूल आते-जाते हैं, तब सड़क पर खड़े भारी वाहन और तेज रफ्तार ट्रक उनके लिए किसी बड़े हादसे का कारण बन सकते हैं। अभिभावकों में भी इस स्थिति को लेकर भारी आक्रोश देखा जा रहा है।

स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार ट्रकों की लंबी कतारें सड़क के दोनों ओर खड़ी रहती हैं, जिससे राहगीरों, दोपहिया वाहन चालकों और स्कूली बच्चों को निकलने में भारी परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते इस अव्यवस्था पर रोक नहीं लगाई गई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है, जिसकी जिम्मेदारी तय करना प्रशासन के लिए आसान नहीं होगा।

ग्रामीणों का आरोप है कि ओवरलोड कोयला वाहन तेज गति से गुजरते हैं, जिससे सड़क पर चलना तक मुश्किल हो गया है। धूल, प्रदूषण और लगातार भारी वाहनों की आवाजाही ने आम लोगों का जीवन प्रभावित कर दिया है। कई बार वाहन चालक हॉर्न बजाते हुए तेज रफ्तार में निकल जाते हैं, जिससे बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे भय के माहौल में सड़क पार करने को मजबूर हैं। लोगों का कहना है कि जिला प्रशासन और पुलिस द्वारा समय-समय पर कोयला परिवहन को लेकर सख्ती के दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल विपरीत दिखाई देती है। यदि बिना कनवॉय के वाहन चल रहे हैं, ओवरलोडिंग हो रही है और स्कूल के सामने भारी वाहनों की पार्किंग बनी हुई है, तो यह संबंधित विभागों की निगरानी व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े करता है।

ग्रामीणों ने यह भी मांग की है कि खनुआ हायर सेकेंड्री स्कूल के आसपास तत्काल कोल वाहनों की पार्किंग हटाई जाए और स्कूल क्षेत्र को “नो पार्किंग जोन” घोषित किया जाए। साथ ही ओवरलोड वाहनों की जांच कर दोषी ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि नियम केवल कागजों तक सीमित रहेंगे तो आम जनता का प्रशासन पर भरोसा कमजोर होगा।

क्षेत्रवासियों ने जिला कलेक्टर, पुलिस अधीक्षक, परिवहन विभाग और खनिज विभाग से संयुक्त अभियान चलाकर पूरे मार्ग की जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि सड़क सुरक्षा, स्कूली बच्चों की सुरक्षा और आम नागरिकों की जान किसी भी व्यावसायिक हित से अधिक महत्वपूर्ण है।

फिलहाल पूरे मामले में संबंधित ट्रांसपोर्टर अथवा प्रशासन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। हालांकि स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई तो वे आंदोलन करने और उच्च अधिकारियों तक अपनी शिकायत पहुंचाने के लिए बाध्य होंगे। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन इन आरोपों की निष्पक्ष जांच कर नियमों का पालन सुनिश्चित करता है या फिर कोयला परिवहन की मनमानी इसी तरह जारी रहती है।